डिग्री कॉलेज टुंडी में बिनोद बाबू एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की जयंती पर किए गए याद ।

टुंडी :डिग्री कॉलेज टुंडी में आज झारखंड आंदोलन के प्रणेता बाबू बिनोद बिहारी महतो एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कॉलेज परिवार, प्राचार्य एवं छात्र-छात्राओं ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. इंद्रजीत कुमार ने कहा कि “बाबू बिनोद बिहारी महतो ने झारखंड की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया।
उनकी सोच और त्याग ही आज हमें अपनी अलग पहचान दिलाने में सफल रहा। वहीं राष्ट्रकवि दिनकर अपनी राष्ट्रीय चेतना, वीर रस और ओजस्वी कविता के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे।
युवा पीढ़ी को चाहिए कि वे इनके आदर्शों से प्रेरणा लें।” मुख्य वक्ता प्रो. अविनाश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “गरीबों, विस्थापितों के मसीहा बिनोद बाबू ने समाज के वंचित तबकों को संगठित कर उन्हें सम्मान और अधिकार दिलाने का काम किया। उनकी दृष्टि केवल राजनीति तक सीमित नहीं थी, बल्कि सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रसार तक विस्तृत थी। बाबू बिनोद बिहारी महतो जी ने कहा था “पढ़ो और लड़ो” साथ ही “कथनी और करनी एक करो” l वहीं दिनकर जी की कविताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत तक लोगों में जोश और आत्मविश्वास जगाया।” डॉoरानी सिंह ने कहा कि हिंदी साहित्य के दीप्तिमान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का काव्य राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत है। साहित्य अकादमी, ज्ञानपीठ, पद्मभूषण पुरस्कारों से सम्मानित कवि की रचनाएं युवाओं को निरंतर कर्मभूमि पर चलने की प्रेरणा देती है। उनकी रचनाओं में एक और जहां युद्ध का हुंकार है वहीं दूसरी ओर कुरुक्षेत्र में शांति का संदेश भी। उन्होंने संस्कृति के चार अध्याय में भारतीय संस्कृति की गहरी पड़ताल करते हुए महत्वपूर्ण स्थापनाएं दी हैं। अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. प्रीतम कुमार ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे और उनके बीच निबंध प्रतियोगिता, कविता पाठ भी आयोजित की गई।













