देसूरी तहसील में मनमानी का आलम: सेवाओं के अप्रूवल के नाम पर चल रहा भ्रष्टाचार

लुनिया टाइम्स न्यूज़, देसूरी। देसूरी तहसील कार्यालय में मूलभूत सेवाओं के लिए आने वाले आमजन इन दिनों भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास और आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज़ों के अप्रूवल में कर्मचारियों की मनमानी का सिलसिला जारी है। प्रार्थियों के आवेदन पर बेवजह आपत्तियां लगाकर फाइलों को रोका जाता है, जिससे लोग मजबूर होकर जेब ढीली करने पर विवश हो जाते हैं।
डिजिटल सिस्टम के बावजूद पुरानी पेंचीदगियां
सरकार ने “जन आधार 2” और ई-KYC जैसी योजनाओं के जरिए दस्तावेज़ों को पूरी तरह डिजिटल करने का दावा किया है। नागरिक की पहचान आधार से स्वतः वेरीफाई हो जाती है, फिर भी तहसील में आधार कार्ड की फोटोकॉपी और अनावश्यक मनमानी की जाती है। सवाल उठता है कि जब सिस्टम पहले ही व्यक्ति की पहचान प्रमाणित कर चुका है, तो यह अतिरिक्त औपचारिकताएं क्यों थोपी जा रही हैं?
बिचौलियों को मिल रहा फायदा
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से कुछ डिजिटल सेवा प्रदाता दलालों की भूमिका निभा रहे हैं। आवेदनकर्ता यदि इनके जरिए पैसा चुकाता है तो उसका काम तुरंत हो जाता है, जबकि नियमों पर भरोसा करने वाले आवेदक को आपत्तियों और स्थगन का सामना करना पड़ता है।
दस्तावेज़ीकरण की मनमानी पर रोक जरूरी
डिजिटल इंडिया के दौर में जनता को अभी भी फोटो कॉपी और ऑफलाइन दस्तावेज़ों के चक्कर में डालना सवाल खड़ा करता है। ज़रूरत इस बात की है कि सभी ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल वेरिफिकेशन को ही अंतिम प्रमाण माना जाए। ऑफलाइन प्रतियों की अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त की जानी चाहिए।
जवाबदेही तय हो
स्थिति तभी सुधरेगी जब वरिष्ठ अधिकारी तहसील कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करें और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करें। यदि कोई कर्मचारी ऑनलाइन वेरीफिकेशन के बावजूद फाइल रोकता है, तो उस पर व्यक्तिगत कार्रवाई होनी चाहिए।
जनता की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि:
- 1. ऑफलाइन दस्तावेज़ों की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
- 2. डिजिटल वेरिफिकेशन को ही अंतिम प्रमाण माना जाए।
- 3. तहसील स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग हो।
- 4. भ्रष्टाचार पर त्वरित कार्रवाई की जाए।












