पुनाडिया आंगनवाड़ी केंद्र पर रक्षाबंधन पर्व उल्लासपूर्वक मनाया गया, माताओं ने बनाई राखियां, बच्चों ने बांधी प्रेम की डोर

- लुनिया टाइम्स न्यूज़, संवाददाता बाबूलाल लोंगेशा, पुनाडिया (बाली)
बाली तहसील के पुनाडिया गांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र पर शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व परंपरागत उत्साह और सांस्कृतिक भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नन्हें-मुन्हें बच्चों से लेकर गांव की मातृ शक्ति ने पूरे उल्लास के साथ भागीदारी निभाई। आयोजन में राखियों की चमक और भाईचारे के रंगों ने माहौल को और भी मधुर बना दिया।
कार्यकर्ता किरण कुमारी ने जानकारी देते हुए बताया कि “राखी बनाओ प्रतियोगिता” का आयोजन विशेष रूप से माताओं के लिए रखा गया था, जिसमें गांव की महिलाओं ने पारंपरिक और नवीनता से भरी राखियों का निर्माण किया। हर राखी में बहनों के स्नेह और भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।
इस मौके पर बच्चों ने आपस में राखी बांधकर एकता, प्रेम, और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और हाथों में राखियां मानो गांव में त्यौहार की आत्मा को जीवंत कर रही थीं। बच्चों के माध्यम से बालपन में ही सांस्कृतिक मूल्यों और भाईचारे की भावना का बीजारोपण किया गया।

विद्यालय और समुदाय की सहभागिता
इस आयोजन को और गरिमा मिली जब स्थानीय राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पुनाडिया के शिक्षकगण भी कार्यक्रम में शामिल हुए। धर्मपाल सरेल, अरविंद पूरी, दुष्यंत कुमार, और अवधेश सिंह गुर्जर जैसे शिक्षाविदों की उपस्थिति ने बच्चों को प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने बच्चों को रक्षाबंधन के ऐतिहासिक, सामाजिक और नैतिक महत्व के बारे में सरल और रोचक तरीके से जानकारी दी।
सहायिका उषा देवी और गांव की अन्य महिलाएं भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। उनके द्वारा बनाए गए पारंपरिक पकवानों और सजावट से आंगनवाड़ी परिसर पूरी तरह रक्षाबंधन की गरिमा में रंगा हुआ दिखाई दिया।
भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ा आयोजन
रक्षाबंधन जैसा पर्व न केवल भाई-बहन के प्रेम को बल देता है, बल्कि समाज में एकता, रक्षा और समर्पण के मूल्यों को भी मजबूती प्रदान करता है। पुनाडिया आंगनवाड़ी केंद्र पर हुआ यह आयोजन इसका जीता-जागता उदाहरण बना।
गांव की महिलाओं और शिक्षकों ने इस प्रयास की सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन गांवों में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता को मजबूती देते हैं।

बालकों ने लिया सुरक्षा और सद्भावना का संकल्प
राखी बांधने के बाद नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आपसी सौहार्द, मित्रता और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया। बालकों ने कहा कि वे ना सिर्फ अपने भाई-बहनों की रक्षा करेंगे, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में काम करेंगे।
समापन पर हुआ सामूहिक प्रसाद वितरण
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित बच्चों और महिलाओं को मिठाई और प्रसाद वितरित किया गया, जिसमें हर चेहरे पर मुस्कान और संतोष देखने को मिला। कार्यक्रम का संचालन सहज और सुंदर रूप से किया गया, जिससे सभी को जुड़ाव और आनंद की अनुभूति हुई।










