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मृत्युंजय नाटक से गूंजा देशप्रेम: भीलवाड़ा में भगत सिंह को समर्पित ऐतिहासिक संध्या

शहीद-ए-आज़म को नमन

‘मृत्युंजय’ नाटक का ऐतिहासिक मंचन | सतत सेवा संस्थान
मूलचंद पेसवानी
जिला संवाददाता

मूलचंद पेसवानी वरिष्ठ पत्रकार, जिला संवाददाता - शाहपुरा / भीलवाड़ा 

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भीलवाड़ा, पेसवानी: सतत सेवा संस्थान द्वारा नगर परिषद सभागार में एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के जीवन पर आधारित नाटक ‘मृत्युंजय’ का सजीव मंचन हुआ। यह नाटक नगरवासियों के हृदय को देशभक्ति के भावों से सराबोर कर गया।

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शहर में गूंजा मां भारती का जयघोष

सांय 7:00 बजे सर्किट हाउस से एक भव्य ओपन जीप जुलूस प्रारंभ हुआ, जिसमें विशेष रूप से शहीद भगत सिंह के भतीजे श्री किरणजीत सिंह और क्रांतिकारी इतिहासकार प्रदीप देशवाल शामिल हुए।

जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे राष्ट्रभक्ति नारों के बीच नगर परिषद सभागार पहुंचा। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर जुलूस का भव्य स्वागत किया।

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दीप प्रज्वलन से आरंभ हुई संध्या

कार्यक्रम की शुरुआत ठीक 7:59 बजे दीप प्रज्वलन से हुई, जिसमें कई संत, जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे:

  • महामंडलेश्वर हंसराम संत
  • काठिया बाबा संत दास जी
  • पं. बृजेंद्र शास्त्री
  • सांसद दामोदर अग्रवाल
  • विधायक अशोक कोठारी
  • महापौर राकेश पाठक
  • RSWM के CEO योगेश दत्त तिवारी

विचारों का संगम: अतिथियों के प्रेरणादायक विचार

किरणजीत सिंह ने कहा:
“भगत सिंह केवल बम और बंदूक की पहचान नहीं थे, बल्कि विचारों के योद्धा थे। उन्होंने युवाओं को जागरूक करने और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का रास्ता दिखाया।”

प्रदीप देशवाल ने कहा:
“भगत सिंह ने जिस भारत का सपना देखा था, वह सामाजिक समानता और शिक्षा से परिपूर्ण था। हमें उनकी विचारधारा को अपनाकर ही सच्ची श्रद्धांजलि देनी होगी।”

‘मृत्युंजय’ नाटक: जीवंत मंचन और भावनाओं की अभिव्यक्ति

नाटक का निर्देशन विजयपाल वर्मा और हरीश पंवार ने किया। इसमें 35 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया, जिन्होंने भगत सिंह के बचपन, शिक्षा, विचार, क्रांति और बलिदान को अत्यंत सजीवता से प्रस्तुत किया।

पूरे सभागार में दर्शकों ने बार-बार ‘शहीद भगत सिंह अमर रहें’ के नारों से मंच को गूंजायमान कर दिया। कई दर्शकों की आंखें नम थीं — यह एक भावनात्मक और ऐतिहासिक अनुभव था।

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सतत सेवा संस्थान की प्रेरणा और लक्ष्य

संस्थापक अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा ने कहा:
“हमारा उद्देश्य केवल एक नाटक मंचित करना नहीं है, बल्कि उस विचारधारा को जीवित रखना है जिसे भगत सिंह ने अपने खून से सींचा था।”

सेवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा ने कहा:
“सतत सेवा संस्थान सदैव राष्ट्रभक्ति, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता रहेगा।”

भविष्य की पीढ़ी के लिए संदेश

इस आयोजन में नगर के प्रबुद्ध नागरिक, छात्र, युवा और सामाजिक संगठन भारी संख्या में उपस्थित रहे। ‘मृत्युंजय’ नाटक न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि यह एक चेतना थी — एक आह्वान था कि हम अपने नायकों के विचारों को समझें, अपनाएं और आगे बढ़ाएं।

इस ऐतिहासिक संध्या ने न केवल शहर में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई, बल्कि युवाओं को प्रेरणा देने का कार्य भी किया, जो आने वाले भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

न्यूज़ डेस्क

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