सोजत: खोखरा गाँव की 1500 परिवारों की प्यास बुझाने में विफल प्रशासन, 8 महीने से बंद पड़ा है मुख्य जल टैंक

ग्रामीणों ने चेताया – समाधान नहीं हुआ तो होगा बड़ा धरना प्रदर्शन
सोजत। निकटवर्ती ग्राम पंचायत खोखरा की लगभग 1500 घरों की आबादी इन दिनों पीने के पानी की भयंकर समस्या से जूझ रही है। गाँव का मुख्य पेयजल स्रोत, ग्रामीण लेवल रिज़र्वायर (जीएलआर), पिछले 7-8 महीनों से पूरी तरह से बंद पड़ा है, जिसके चलते ग्रामवासियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों के लिए रोजमर्रा का जीवन दूभर हो गया है।
इस संकट की सबसे ज्यादा मार गाँव की महिलाओं और युवतियों पर पड़ रही है, जिन्हें पानी की जरा सी भी जरूरत पूरी करने के लिए लगभग 2 किलोमीटर पैदल चलकर गोशाला तक का सफर तय करना पड़ता है। भारी बर्तनों में पानी ढोकर लाना उनकी मजबूरी बन गई है, जिससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
लुणिया टाइम्स के रिपोर्टर गोपाल सिंह खोखरा ने बताया कि, “यह समस्या कोई नई नहीं है। हमने इसकी शिकायत कई बार राजस्थान संपर्क पोर्टल के माध्यम से की है। सोजत के जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों को भी बार-बार अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले और कोई ठोस समाधान नहीं निकला। प्रशासन की इस उदासीनता से ग्रामवासी बहुत नाराज हैं।”
देवासीयों की ढाणी और स्कूल भी अछूते नहीं
यह पानी का संकट सिर्फ मुख्य गाँव तक सीमित नहीं है। गाँव के देवासीयों की ढाणी में लगभग 60 घरों की आबादी के लिए बना जीएलआर भी पिछले 5 महीनों से बंद पड़ा है, जिससे वहाँ रहने वाले परिवार भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
इसके अलावा, गाँव के बेरा हाडकी स्कूल की स्थिति भी चिंताजनक है। स्कूल की पानी की ट्यूबवेल भी 2-3 महीनों से खराब पड़ी है, जिसके कारण स्कूल के टैंक में पीने का पानी नहीं है। इससे पढ़ने वाले नन्हे-मुन्हे बच्चों को भी गर्मी में प्यास से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामवासियों का आक्रोश सीमा पर, धरने की चेतावनी
पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है और इसके अभाव में खोखरा गाँव के चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामवासी लगातार हो रही उपेक्षा से आक्रोशित हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस समस्या का उचित और स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण लेकिन बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अब यही एकमात्र रास्ता बचा है।
ग्रामवासियों की मांग है कि तत्काल जलदाय विभाग की टीम गाँव का दौरा करे, सभी खराब जीएलआर और ट्यूबवेल की मरम्मत कराए और भविष्य में ऐसी समस्याओं के निवारण के लिए एक स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे।














