बाली में धार्मिक उत्सवों की भव्य छटा: हिंदू सम्मेलन पूर्व कलश यात्रा से लेकर जैन पंचाहिक महोत्सव तक श्रद्धा और उल्लास का संगम

बाली नगर में धर्म, श्रद्धा और उत्साह का महापर्व
कलश यात्रा | हिंदू सम्मेलन | पंचाहिक महोत्सव | वंदे गुरूवर संवेदना
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हिंदू सम्मेलन पूर्व भव्य कलश यात्रा एवं शोभायात्रा
बाली।
श्री सनातनी सर्व हिंदू समाज मुख्य बाजार बस्ती, बाली नगर के तत्वाधान में 1 फरवरी को आयोजित होने वाले हिंदू सम्मेलन की पूर्व तैयारी के निमित भव्य कलश यात्रा एवं शोभायात्रा का आयोजन किया गया।
समिति अध्यक्ष अजय पूरी ने बताया कि शोभायात्रा महामंडलेश्वर श्री संतोष दास जी महाराज (लारा भाकर) की निश्रा में पीपलेश्वर मंदिर बाली से शुभारम्भ होकर प्रताप चौक, पृथ्वीराज चौहान चौक, बेरा चौक, गणेश बाजार, मुख्य बाजार होते हुए श्री हनुमान मंदिर, आकावा में समापन हुई।
कलश यात्रा में सैकड़ों माताओं-बहनों एवं धर्मप्रेमियों की उपस्थिति रही। यह यात्रा 01.02.26 को दोपहर 12:39 बजे होने वाले हिंदू सम्मेलन की अलख जगाने के उद्देश्य से निकाली गई।

कलश यात्रा एवं शोभायात्रा को सफल बनाने में वनाराम चौधरी, सुरेश कंसारा, थानसिंह राव, नरेन्द्र परमार, जगदीश सोनी, फूलचंद टेलर, भरत टेलर, रणवीर गेमावत, श्रीपाल राठौड़, विक्रम राठौड़, अर्जुन सिंह, गोविंद लुहार, जितेंद्र टेलर, रूपाराम घांची, भगवान लुहार, ललित वैष्णव, जेठाराम जनवा, अमित देवगन, भावेश मारू, बद्री सोनी, बाबूलाल डांगी, हका राम पालीवाल, ओम वैष्णव, नरेश वर्मा, मातृ शक्ति सीता कंवर, संतोष पूरी, दुर्गा बाई, शारदा बाई, राधा मारू, अमृतवकंवर, भावना सुथार, चंदा परमार, संतोष टेलर, शांता सोनी, लक्ष्मी देवी डांगी, कन्या देवी डांगी, डिंपल वर्मा, पूजा सुथार सहित सभी माताओं-बहनों एवं धर्मप्रेमियों का विशेष सहयोग रहा।
वंदे गुरूवर संवेदना कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ संपन्न
गोङवाङ की पावन धर बाली नगर के प्रथम आचार्य, विश्व विख्यात परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री विजय रत्नसेन सूरीश्वर जी (राजु महाराज) के सांसारिक जीवन के 50वें वर्ष में प्रवेश के निमित्त आयोजित पंचाहिक महोत्सव के शुभ अवसर पर न्याति नोहरा में पांचवें दिन वंदे गुरूवर संवेदना का भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।
प्रातः 9:30 बजे आचार्य गुरूभगवंत रत्नसेन सूरीश्वर माराज साहेब आदि ठाणा को वाजते-गाजते,
मिठीमां आराधना भवन से शहनाई की मधुर ध्वनि के साथ न्याति नोहरा लाया गया। जहां पहले से ही पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था।
जैनाचार्य श्री का सर्वविरति सुवर्ण महोत्सव मंडप में मंगलमय प्रवेश हुआ।
गुरुभक्तों ने चांदी के 50 सिक्कों द्वारा कदम-कदम पर पूजन किया।
मंच संचालन भायंदर के चेतन भाई मेहता (सी.ए.) ने किया। जैनाचार्य के 49 वर्ष के संयम काल के 17,895 दिनों में 632 उपवास, 685 आयंबिल तप, 15,203 एकासणा, 45 लुखी निवी, 1,172 बियासणा जैसी कठोर तप साधना तथा 264 पुस्तकों के लेखन का उल्लेख किया गया।
गुरुदेव के गुरूपूजन, कांबली अर्पण एवं अक्षत से वधामना का लाभ ईदरमलजी जीवराजजी वकील साहेब ने सोहनराजजी भंडारी के हस्ते लिया। बाबुभाई मंडलेसा, सज्जनराज जी रांका, किरण जी चोपड़ा, भरतभाई कोठारी, भावेश चोपड़ा, प्रितम ओसवाल सहित अनेक गणमान्यजनों ने अपने मनोगत भाव व्यक्त किए।
आचार्य गुरूभगवंत रत्नसेन सूरीश्वर माराज साहेब के शिष्य मुनि शेलीभद्र विजयजी, स्थूलभद्र विजयजी, विमलपुण्य विजयजी एवं पुण्यबल विजयजी ने प्रवचनों के माध्यम से गुरू गुणानुवाद किया। पंडाल में रमझट जमाने के लिए अनिल भाई गेमावत के नेतृत्व में कड़ाके की सर्दी के बावजूद भक्तजन झूम उठे और नृत्य करने लगे।
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