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सुमेरपुर: “जिंदगी से जंग हार गए, लेकिन एंबुलेंस ने नहीं छोड़ा किराया!” मृत मरीज के परिवार से धुलाई शुल्क तक वसूला, निजी सेवाओं की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल

सुमेरपुर: मौत के बाद भी वसूली! एंबुलेंस ने किराया और धुलाई शुल्क तक नहीं छोड़ा

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  • रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर


जिंदगी से जंग हार गए, लेकिन एंबुलेंस ने नहीं छोड़ा किराया!

रास्ते में मरीज की मौत के बाद भी वसूले पूरे पैसे, धुलाई शुल्क जोड़ने का भी आरोप

सुमेरपुर। राजस्थान के सुमेरपुर क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।
गंभीर हालत में रेफर किए गए अमराराम माली की रास्ते में मौत हो जाने के बावजूद
एंबुलेंस चालक द्वारा पूरा किराया और अतिरिक्त धुलाई शुल्क वसूले जाने का आरोप लगा है।
पीड़ित परिवार ने इसे “आपदा में अवसर” तलाशने जैसा अमानवीय और गैरकानूनी कृत्य बताया है।

परिवार का आरोप: 5,000 रुपये किराया + 1,000 रुपये धुलाई शुल्क जबरन वसूले गए

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क्या है पूरा मामला

परिजनों के अनुसार, 24 फरवरी को अमराराम माली की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सुमेरपुर के
निजी अस्पताल ‘देवल पटेल’ में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने
25 फरवरी को दोपहर करीब 3 बजे उन्हें उदयपुर रेफर कर दिया।

परिवार का कहना है कि उदयपुर ले जाते समय रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया।
इसके बावजूद एंबुलेंस चालक राहुल प्रजापत ने न तो संवेदनशीलता दिखाई और न ही किराए में कोई रियायत दी। उल्टा पूरे 5,000 रुपये किराया लेने के साथ वाहन धुलाई के नाम पर
अतिरिक्त 1,000 रुपये और वसूल लिए।

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सांसद नाम लिखी एंबुलेंस पर बढ़ा विवाद

विवाद को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि एंबुलेंस पर “सौजन्य सांसद लुंबाराम चौधरी” लिखा हुआ था।
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे लिखे होने से आमजन को भरोसा रहता है कि
सेवा पारदर्शी और जनहित में होगी, लेकिन इस मामले में व्यवहार बिल्कुल विपरीत बताया जा रहा है।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त एंबुलेंस अक्सर निजी अस्पतालों के बाहर खड़ी रहती है और गंभीर स्थिति में मरीजों को ले जाने के दौरान मनमाने तरीके से किराया वसूला जाता है।

नियम क्या कहते हैं

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सामान्य प्रावधानों के अनुसार यदि मरीज तय गंतव्य तक नहीं पहुंचता,
तो एंबुलेंस किराया वास्तविक तय दूरी के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।
किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क बिना पूर्व सूचना और लिखित सहमति के लेना नियम विरुद्ध माना जाता है। साथ ही भुगतान की रसीद देना भी अनिवार्य होता है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निजी एंबुलेंस सेवाओं में दरों को लेकर पारदर्शिता की कमी है। अक्सर परिवार आपातकालीन तनाव में होते हैं, जिसका फायदा उठाकर अधिक राशि वसूल ली जाती है।

जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें:

  • सभी निजी एंबुलेंस में अधिकृत दर सूची अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए
  • धुलाई या अन्य अतिरिक्त शुल्क के स्पष्ट नियम बनाए जाएं
  • उल्लंघन करने वालों का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जाए
  • आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के मानक सार्वजनिक किए जाएं
  • जिले स्तर पर शिकायत हेल्पलाइन सक्रिय की जाए

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, सीएमएचओ और परिवहन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में अन्य परिवार भी मानसिक और आर्थिक शोषण का शिकार होते रहेंगे।

अब नजर प्रशासन पर टिकी है—क्या होगी सख्त कार्रवाई या फिर संवेदनहीन वसूली यूं ही जारी रहेगी? 

न्यूज़ डेस्क

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