25वां कला मेला बना राजस्थान के गौरव का दर्पण, युवा कलाकारों ने इतिहास को रंगों में उकेरा
जयपुर। राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास को सजीव रूप देने वाला 25वां कला मेला-2026 इन दिनों जयपुर में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गुरुवार को मेले के तीसरे दिन ‘राजस्थान का गौरवशाली इतिहास’ विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी, जिसमें युवा विद्यार्थियों की प्रतिभा और रचनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
युवा कलाकारों ने इतिहास को दिया नया स्वरूप
चित्रकला प्रतियोगिता में महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर के लगभग 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने चित्रों के माध्यम से राजस्थान के शौर्य, परंपरा, वीरता और सांस्कृतिक वैभव को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। उनके कैनवास पर इतिहास के गौरवशाली प्रसंग, लोक जीवन और परंपराएं रंगों के जरिए जीवंत हो उठीं।

विजेताओं ने बिखेरा प्रतिभा का रंग
प्रतियोगिता में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के कृष्णकांत टोंगरिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि इसी संस्थान की नंदिनी सुथार द्वितीय स्थान पर रहीं। तृतीय स्थान सुभारती विश्वविद्यालय के मोहित सैनी को मिला।
इसके अलावा एमिटी यूनिवर्सिटी की अक्षिता भदौरिया, महारानी कॉलेज की भूमिका जांगिड़, सुभारती विश्वविद्यालय के चिराग कुमार, श्री गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय के शल्य सिंह राठौड़ तथा आकृति एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की अन्नू प्रजापत को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। सभी विजेताओं को 21 मार्च को राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
कार्यशालाओं में सीख और सृजन का संगम
कला मेला संयोजक हरशिव शर्मा ने बताया कि कला शिविर के दूसरे दिन प्रदेश के 9 वरिष्ठ कलाकारों ने अपनी विशिष्ट शैली में सृजन कर प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
फ्रेस्को कार्यशाला में डॉ. नाथूलाल वर्मा ने रंग निर्माण की विधि और टाइल पर प्रयोग की तकनीक सिखाई, वहीं कैलीग्राफी कार्यशाला में हरिशंकर भालोठिया ने विभिन्न स्टाइल, शेरिफ और कलम होल्डिंग की प्रायोगिक जानकारी दी।

दर्शकों में उत्साह, कला को मिली सराहना
कला मेले में बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने कलाकारों की रचनात्मकता का आनंद लिया और उनकी प्रतिभा की खुलकर सराहना की। पूरा आयोजन कला प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक मंच बन गया, जहां परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिला।
25वां कला मेला न केवल एक प्रतियोगिता या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और युवा प्रतिभाओं को मंच देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और कला के माध्यम से इतिहास को जीवंत रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।













