80 करोड़ के मालिक और साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का वृद्धाश्रम में निधन, बेटा-बेटी अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे

वाराणसी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का वृद्धाश्रम में निधन, संतानें रहीं अनुपस्थित
वाराणसी के प्रतिष्ठित साहित्यकार श्रीनाथ खंडेलवाल का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शनिवार सुबह एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। अपने जीवनकाल में उन्होंने 400 से अधिक पुस्तकों की रचना की और लगभग 80 करोड़ रुपये की संपत्ति के स्वामी थे। दुर्भाग्यवश, जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें अपने ही बच्चों द्वारा घर से निकाल दिया गया, जिससे वे सारनाथ स्थित काशी कुष्ठ सेवा संघ वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हुए।
25 दिसंबर को सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की सूचना मिलने पर भी उनका बेटा और बेटी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। बेटा, जो एक व्यवसायी है, ने शहर से बाहर होने का बहाना बनाया, जबकि बेटी, जो सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं, ने फोन तक नहीं उठाया।
सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर और उनकी टीम ने श्री खंडेलवाल के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने उनके शव को सराय मोहाना घाट पहुंचाया और विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
श्रीनाथ खंडेलवाल ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत 15 वर्ष की आयु में की थी। उन्होंने शिव पुराण, मत्स्य पुराण, पद्म पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों का हिंदी अनुवाद किया। उनकी रचनाएँ हिंदी, संस्कृत, असमिया और बांग्ला भाषाओं में उपलब्ध हैं। जीवन के अंतिम दिनों में वे नरसिंह पुराण का अनुवाद कर रहे थे, जो अधूरा रह गया।
कुछ माह पूर्व उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया था कि 80 करोड़ की जायदाद छीनकर बच्चों ने घर से निकाल दिया, जिससे वृद्धाश्रम में रहना पड़ रहा है।
श्रीनाथ खंडेलवाल की दुखद मृत्यु और उनके बच्चों की बेरुखी समाज के लिए एक गंभीर संदेश है, जो पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान पर पुनर्विचार करने को प्रेरित करता है।













