कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र सुमेरपुर में गंदगी का साम्राज्य—पालिका नाकाम

मुख्य बाजार में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर, दुकानों में घुसती बदबू; शिकायतों के बाद भी बेअसर सिस्टम
- रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर
सुमेरपुर। कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र सुमेरपुर में इन दिनों गंदगी ने ऐसा डेरा जमा लिया है कि स्वच्छता के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं। शनिवार सुबह शहर के मुख्य बाजार से लेकर प्रमुख मार्गों तक नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता नजर आया, जिससे आमजन और व्यापारी दोनों ही परेशान हैं।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति भैरू चौक से हनुमान मंदिर मार्ग तक देखने को मिल रही है, जहां दुकानों के बाहर गंदा पानी जमा है और नालियां ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैल रही हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि दुकानदारों के लिए अपनी दुकानों में प्रवेश करना भी मुश्किल हो गया है। बदबू के कारण पूरे क्षेत्र का माहौल प्रभावित है और ग्राहकों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है।
सफाई के नाम पर लाखों खर्च, जमीनी हकीकत शून्य
पालिका प्रशासन हर साल स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। शहर में सफाई व्यवस्था कागजों तक सीमित नजर आ रही है, जबकि वास्तविकता में गंदगी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
शिकायतों के बावजूद बेअसर प्रशासन
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार पालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। नियमित सफाई के अभाव में नालियां जाम रहती हैं और पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है।

जनता पस्त, जिम्मेदार मस्त
एक ओर आमजन और व्यापारी गंदगी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी और पालिका प्रशासन उदासीन नजर आ रहे हैं। बैठकों और भाषणों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे जनता में रोष बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गंदगी और खुले में बहता नाली का पानी संक्रामक बीमारियों को जन्म दे सकता है। ऐसे में यह समस्या केवल असुविधा ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
जनता की मांग
नगरवासियों और व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, जल निकासी की स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और मुख्य बाजार क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ किया जाए।कैबिनेट मंत्री के गृह क्षेत्र में इस तरह की बदहाल सफाई व्यवस्था प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और विकराल हो सकती है। अब देखना यह है कि सिस्टम कब सक्रिय होता है और सुमेरपुर की जनता को इस समस्या से कब राहत मिलती है।











