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भीलवाड़ा बना शिवमय, कथा स्थल पर उमड़ा अपार श्रद्धालु सागर

पं. प्रदीप मिश्रा का आह्वान—बेटियों को मजबूत बनाओ, खुद की रक्षा के योग्य बनाओ

  • सत्यनारायण सेन गुरला

भीलवाड़ा। मेवाड़ की पावन धरा इन दिनों भक्ति और आध्यात्म के रंग में डूबी हुई है। शहर के मेडिसिटी ग्राउंड में पहली बार आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ने आस्था का विशाल संगम खड़ा कर दिया है। कथा के पहले ही दिन लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। करीब 11 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बने विशाल डोम और पांडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए, जबकि बाहर तक जनसैलाब उमड़ता नजर आया।

कथा के सूत्रधार पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे ही संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के साथ मंच पर पहुंचे, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ के जयघोष से गूंज उठा। व्यास पीठ पर विराजित होने से पूर्व उन्होंने भीलवाड़ा की भूमि को नमन करते हुए यहां की आस्था को अद्वितीय बताया।

प्रथम दिन गुरु वंदना के साथ कथा की शुरुआत करते हुए पंडित मिश्रा ने शिव भक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति सरल और सहज है—सच्चे मन से अर्पित एक लोटा जल भी जीवन की कठिनाइयों को दूर कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को अटूट विश्वास और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

बेटियों को बनाओ सामर्थ्यवान

कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने समाज को जागरूक करते हुए कहा कि बेटियों को केवल शिक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना जरूरी है। “बेटियों को पढ़ाओ, मजबूत बनाओ और जरूरत पड़े तो आत्मरक्षा के साधन भी सिखाओ,” उन्होंने कहा।
उन्होंने “बहू पढ़ाओ—देश बचाओ” का नारा देते हुए महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति की आधारशिला बताया।

भक्ति रस में डूबा माहौल

कथा के दौरान ‘दमादम भोले शंकर’ और ‘भोले आपकी कृपा से सब काम हो रहा है’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। विशेषकर महिला श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला और पूरा पांडाल भक्ति में सराबोर नजर आया।

“भगवान की इच्छा से ही होती है कथा”

पंडित मिश्रा ने कहा कि कोई भी धार्मिक आयोजन भगवान की इच्छा के बिना संभव नहीं होता। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तैयारियों के बावजूद कथा नहीं हो सकी, लेकिन इस बार भगवान की कृपा से आयोजन संभव हुआ। उन्होंने महंत बाबूगिरी महाराज के प्रयासों की सराहना की।

आभूषण नहीं, रुद्राक्ष धारण करें

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि कथा में कीमती आभूषण पहनकर न आएं, बल्कि रुद्राक्ष धारण करें, क्योंकि उस पर भगवान शिव की कृपा रहती है।

व्यवस्थाएं चाक-चौबंद

आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए छाया, पेयजल, बैठने और पार्किंग की व्यापक व्यवस्था की गई है। पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए यातायात को सुचारु रखने के लिए बैरिकेडिंग और वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है।

कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित हो रही है। पहले दिन उमड़े जनसैलाब को देखते हुए आने वाले दिनों में और भी अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक संदेश का भी सशक्त मंच बनकर उभर रहा है।

न्यूज़ डेस्क

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