ऐसे सक्रिय जनप्रतिनिधि को पुनः अवसर देने की मांग तेज, राज्यसभा में फिर भेजने की उठी आवाज

ऐसे सक्रिय जनप्रतिनिधि को पुनः अवसर देने की मांग तेज, राज्यसभा में फिर भेजने की उठी आवाज
नई दिल्ली/जयपुर। राज्यसभा सांसद नीरज डांगी द्वारा अपने कार्यकाल में राष्ट्रीय और राजस्थान से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के बाद प्रदेशभर में उन्हें पुनः राज्यसभा भेजने की मांग तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सदन में आमजन की समस्याओं को मजबूती से रखा और सरकार का ध्यान जनहित की ओर आकर्षित किया।
डांगी द्वारा राज्यसभा में उठाए गए प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं —
- विदेशी इंटरनेट कंपनियों पर कर नीति (गूगल टैक्स) में पारदर्शिता और भारतीय स्टार्टअप्स के हितों की सुरक्षा।
- बढ़ते हवाई किरायों पर नियंत्रण और मध्यम वर्ग को राहत।
- बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस सीमा ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करने की मांग।
- रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़ की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।
- राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग।
- किसानों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी, फसल बीमा और उचित मुआवजा।
- बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण और आमजन को राहत।
- देसूरी नाल में सड़क सुरक्षा, चौड़ीकरण और वैकल्पिक मार्ग निर्माण की मांग।
- पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने और पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग।
- सिरोही–जालौर क्षेत्र में एम्स या सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना की मांग।
- आबूरोड–सिरोही रेलवे सुविधाओं का विस्तार और ट्रेनों के ठहराव में वृद्धि।
- नर्मदा परियोजना विस्तार और पश्चिमी राजस्थान के पेयजल संकट का समाधान।
- अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक और पर्यावरण संरक्षण।
- आदिवासी एवं जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं का विस्तार।
- युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और लंबित भर्तियों में तेजी।
समर्थकों का कहना है कि नीरज डांगी ने सदन में दलित, आदिवासी, किसान, युवा और वंचित वर्ग की सशक्त आवाज बनकर कार्य किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वे राजस्थान में दलित समाज के एक बड़े और प्रभावशाली चेहरे के रूप में स्थापित हुए हैं। ऐसे सक्रिय और मुखर जनप्रतिनिधि को पुनः अवसर देकर राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए, ताकि प्रदेश और देश के हितों की आवाज पहले की तरह मजबूती से उठती रहे।













