नाले की आड़ में 5.60 लाख की डेयरी पर खतरा! 1000 लीटर दूध से चलती सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी दांव पर

प्रभु लाल लोहार
भीलवाड़ा जिले के सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सोरामजी का खेड़ा में महिलाओं की आजीविका से जुड़ी डेयरी अब विवादों के घेरे में आ गई है। वर्ष 2022-23 में करीब 5.60 लाख रुपये की लागत से निर्मित महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति का डेयरी भवन नाले की शिकायत के बाद कार्रवाई की आशंका में है, जिससे ग्रामीणों में चिंता और आक्रोश व्याप्त है।
2023 से संचालित, सैकड़ों परिवारों का सहारा
01 जनवरी 2023 को पूर्ण हुआ यह डेयरी भवन पिछले दो वर्षों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है। यहां प्रतिदिन दूध संग्रहण का कार्य नियमित रूप से हो रहा है और कई पशुपालक परिवारों की आय इसी व्यवस्था पर निर्भर है।
“नाला कहां है?”—ग्रामीणों का सवाल
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब डेयरी भवन के पास नाले की शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद निर्माण हटाने की चर्चाएं तेज हो गईं।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, वहां आसपास कोई नाला मौजूद ही नहीं है। उनका आरोप है कि बिना भौतिक सत्यापन के एक उपयोगी और संचालित परियोजना को विवादों में घसीटा जा रहा है।


रोज़ 1000 लीटर दूध से चल रही अर्थव्यवस्था
ग्रामीणों के अनुसार सोरामजी का खेड़ा और नन्दशा से प्रतिदिन लगभग 1000 लीटर दूध एकत्रित किया जाता है। इस डेयरी से—
- अनेक पशुपालक परिवार जुड़े हुए हैं
- महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है
- नियमित आय का साधन विकसित हुआ है
- गांव में पशुपालन को प्रोत्साहन मिला है
ग्रामीणों का कहना है कि यदि डेयरी पर कोई कार्रवाई होती है तो इसका सीधा असर सैकड़ों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।
पहले जांच, फिर निर्णय की मांग
समिति से जुड़े ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पहले मौके का भौतिक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।











