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परशुरामजी की तपस्या और शिव आराधना: मातृकुंडिया का आत्मशुद्धि मार्ग

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Satyanarayan Sen
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब परशुरामजी ने मातृकुंडिया के पवित्र कुंड में स्नान किया, तो उन्होंने अपने मन, वाणी और कर्म से शुद्ध होकर भगवान भोलेनाथ की गहन आराधना आरंभ की।

उनकी यह तपस्या इतनी कठोर और भावनात्मक थी कि स्वयं महादेव शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी मातृहत्या के पाप से मुक्ति प्रदान की।

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इसी दिव्य प्रसंग के कारण यह स्थान मोक्षदायिनी भूमि माना जाता है और आज भी श्रद्धालु यहां शिव की आराधना कर आत्मिक शांति एवं पापमोचन की कामना करते हैं।

न्यूज़ डेस्क

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