विक्रम बी राठौड़
रिपोर्टर
विक्रम बी राठौड़, रिपोर्टर - बाली / मुंबई
भायंदर/बाली। पूर्वी अफ्रीका के युगांडा स्थित कम्पाला में एक अफ्रीकी महिला द्वारा वर्षितप जैसी कठिन तपस्या पूर्ण करने का प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। 20 अप्रैल 2026, सोमवार को मिस ऐग्नेश नामक महिला ने वर्षितप का पारणा किया, जिसे जैन समाज में विशेष साधना के रूप में देखा जाता है।
मिस ऐग्नेश, जो मूलतः अफ्रीकी संस्कृति में पली-बढ़ी हैं, कम्पाला में एक जैन परिवार के साथ रहकर कार्य करती हैं। इसी दौरान जैन धर्म के सिद्धांतों से प्रभावित होकर उन्होंने वर्षितप की कठोर साधना प्रारंभ की और सफलतापूर्वक पूर्ण की।

इस तपस्या के दौरान उन्होंने आसोज और चैत्र मास की आयंबिल ओली का पालन किया, जो अत्यंत संयम और अनुशासन की साधना मानी जाती है। आयंबिल में बिना तेल, बिना नमक का सादा भोजन ग्रहण किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तप करते हुए दैनिक कार्यों में सहयोग भी जारी रखा।
मिस ऐग्नेश ने अपने जीवन में चौविहार सहित कई उपवास किए, जिनमें आठ उपवास बिना जल के तथा कुल 15 उपवास सम्मिलित हैं। उन्होंने आजीवन मांसाहार का भी त्याग किया है, जो उनके जीवन में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है।
उनकी पुत्री वर्तमान में स्वामीनारायण स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है। मिस ऐग्नेश की इस साधना को जैन समाज में सराहना और अनुमोदना मिल रही है। यह घटना न केवल आस्था का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि धर्म और साधना की प्रेरणा सीमाओं और संस्कृतियों से परे होती है।