यूपी में वाल्मीकि समाज की भागीदारी को लेकर उठा असंतोष, रविशंकर हवेलकर ने सरकार से उठाई बड़ी मांगें


*रविशंकर हवेलकर ने उत्तर प्रदेश में वाल्मीकि समाज की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कई कार्य किए हैं, लेकिन वाल्मीकि स्वच्छकार समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व और अधिकार अब तक नहीं मिल पाए हैं।*
*उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुसूचित जाति वर्ग के विभिन्न समाजों के विधायकों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन वाल्मीकि समाज की भागीदारी बेहद निराशाजनक है। रविशंकर हवेलकर के अनुसार कुरील समाज के 29, पासी समाज के 28, खटीक समाज के 11, कोरी समाज के 8, धोबी समाज के 4 और आदिवासी वर्ग के 6 विधायक हैं, जबकि वाल्मीकि समाज का केवल एक विधायक और एक सांसद ही प्रतिनिधित्व कर रहा है।*
*उन्होंने मांग उठाई कि वाल्मीकि और स्वच्छकार समाज की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सफाई कर्मचारी आयोग का गठन किया जाए। साथ ही सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, सीधी भर्ती और आयोग की सिफारिशों के आधार पर सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाए।*
*रविशंकर हवेलकर ने कहा कि आरक्षण में वर्गीकरण लागू किया जाना चाहिए और आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी दी जानी चाहिए।उन्होंने भाजपा संगठन में बनने वाले जिला अध्यक्षों में 25 पद वाल्मीकि समाज को देने, 23 विधानसभा टिकट समाज को आवंटित करने तथा कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री, विधायक, एमएलसी और आयोगों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष जैसे पदों पर भी वाल्मीकि समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग रखी। सफाई कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी किए जाने एवं सफाई कार्य को प्राइवेट एजेंसी को दिए जाने पर उनके प्रति उदासीन रवैया पर सब लोग*
*उन्होंने सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के उत्थान के कार्य बहुत धीमी गति से हो रहे हैं और यदि जल्द मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज में नाराजगी और बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार से शीघ्र कार्रवाई कर वाल्मीकि समाज को उचित सम्मान और भागीदारी देने की अपील की*




