अनंत आद्याशक्ति राजराजेश्वरी आशापुरा माताजी नाडोल नगरी में अष्टमी हवन एवं पूजन सम्पन्न

नाडोल (पाली)। नवरात्रि के पावन अवसर पर नाडोल नगरी स्थित अनंत आद्याशक्ति राजराजेश्वरी आशापुरा माताजी मंदिर में अष्टमी के दिन भव्य हवन और पूजन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की आराधना की गई।
हवन के दौरान वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच यह श्लोक उच्चारित हुआ –
“श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां महागौरी की उपासना से आत्मिक शांति, दिव्य शक्तियों की प्राप्ति और जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है।

आयोजन का संचालन
मंदिर के व्यवस्थापक लाल सिंह शक्तावत के मार्गदर्शन में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
- हवन कुंड संयोजक – भीम सिंह देवड़ा (गलथनी)
- मंत्रोच्चारण एवं आहुतियां – पंडित नटवर ने संपन्न करवाईं।
प्रमुख उपस्थितजन
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे जिनमें जीवन रक्षक रक्तदाता एवं सनातन संगठन के प्रणेता रामपाल सिंह मेवाड़ा (सादड़ी), गीता मेवाड़ा, रणजीत सिंह, प्रेमलता (उदयपुर), सोमाराम, कांता देवी (पिंडवाड़ा), नारायण, मोती की दिशा मिली, मनीष मेवाड़ा, प्रीतम मालवीय, शिव प्रताप सिंह, युक्ति सूर्य कंवर देवड़ा (पतावा), सूर्यभान सिंह, प्रहलाद सिंह, पप्पू सिंह, पार्थ जैनू पार्थ, मदन सिंह राव, जयंती भाई (पालनपुर), महेंद्र सिंह, शकुंतला (खतौली, कोटा), रघुनाथ सिंह (वेरा, जेतपुरा), प्रवीण भाई (लालराई), उगम कंवर, शंकर, जगदीश जाट, संजय और रमेश सेन शामिल रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर देश और समाज की खुशहाली की कामना की।
अष्टमी पूजन का महत्व
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा का महागौरी स्वरूप पूजित किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि महागौरी की साधना से सभी दुखों का नाश होता है और भक्त के जीवन में शांति, सौभाग्य और सुख-समृद्धि आती है।
नाडोल नगरी का यह धार्मिक आयोजन आस्था और भक्ति का प्रतीक रहा। मंदिर प्रांगण में आयोजित हवन और पूजन ने वातावरण को पवित्र बना दिया। भक्तों ने मां महागौरी से जीवन में सुख-शांति और देश की उन्नति की कामना की।











