आगम शास्त्र परमात्मा महावीर के साक्षात् वचन है’

मालदास स्ट्रीट
जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म. सा. की शुभ निश्रा में श्री श्वे. मू. जैन संघ – मालदास स्ट्रीट उदयपुर में नमस्कार महामंत्र के नौ दिवसीय अखंड भाष्य जाप के साथ नौ एकासना और परमात्म भक्ति का नवाह्निका महोत्सव बड़े हर्षोल्लास पूर्वक चल रहा है। महोत्सव के साँतवें दिन पैतालीस आगम तप के आराधकों की ओर से सामुहिक रूप से तेइस आगमों की पूजा पढाई गई।
धर्मसभा को प्रवचन देते हुए जैनाचार्यश्री ने कहा कि-
पंचमकाल के इस विषय काल में हमारी आत्मा के लिए धर्ममार्ग में स्थिर होने के लिए प्रभु की प्रतिमा और प्रभु के वचन स्वरूप आगम सूत्र सर्वश्रेष्ठ आलंबन है।
तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी के मुखारविन्द से निकली हुई जिनवाणी को गणधर भगवन्तों द्वारा आगम ग्रन्थों में सूत्र के रूप में ग्रथित की गई है। मूलसूत्र, निर्युक्ति, चूर्णि, भाष्य और टिका स्वरूप जिनागमों के पांचों अंग धर्मप्रेमी जीवों के लिए प्रमाणभूत है।
पूर्व काल में 84 आगम ग्रंथ विद्यमान थे। उन एक-एक ग्रंथ का प्रमाण खूब विशाल था। कालक्रम से हुए अनेक प्राकृतिक उपद्रव, युद्ध एवं वैधर्मी आक्रमणों के कारण आगम शास्त्र का बहुत बडा हिस्सा वर्तमान में अलभ्य है। फिर भी जो कुछ भी बचा है वह भव्य जीवों के उद्धार हेतु अत्यंत प्रेरणादायी है।.
आयम ग्रंथों की सुरक्षा, श्रुतज्ञान का लेखन और उसका प्रचार-प्रसार करना हमारा परम कर्तव्य है। जिन-आगम की भक्ति साक्षात् परमात्मा की भक्ति समान अत्यंत ही लाभदायी है।
दि. 14 सितंबर को प्रातः 8:30 बजे शेष 22 आगमों की पूजा पढाई जाएगी।













