किशन सालवी आत्महत्या मामला: आरोपी अनिताराज की हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज, ओमप्रकाश गर्ग अब तक नहीं हुआ पेश

गंगापुर/जोधपुर। राजस्थान के राजसमंद जिले के कोशीथल गांव निवासी किशन सालवी की आत्महत्या मामले में बड़ी प्रगति सामने आई है।
आत्महत्या के लिए उकसाने की आरोपी दिल्ली निवासी अनिताराज की जमानत याचिका जोधपुर उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। वहीं, इस मामले में नामजद एक अन्य आरोपी ओमप्रकाश गर्ग ने अब तक हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद जांच अधिकारी के सामने उपस्थिति नहीं दी है।
अनिताराज की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
फरवरी 2025 में आत्महत्या करने वाले किशन सालवी की मौत के मामले में मुख्य आरोपी अनिताराज ने जोधपुर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।
पीड़ित पक्ष की ओर से लखन सालवी ने कोर्ट में पैरवी के लिए पीपी हाथीसिंह जोधा, एडवोकेट के.एल. चौहान और एडवोकेट सतीश कुमार को नियुक्त किया था। जमानत खारिज होने से पीड़ित परिवार को आंशिक न्याय मिला है और जांच को गति मिली है।
हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना, ओमप्रकाश अब तक फरार
जानकारी के अनुसार, चित्तौड़गढ़ जिले के नगरी गांव निवासी ओमप्रकाश गर्ग ने धारा 482 सीआरपीसी के तहत एफआईआर रद्द करवाने और गिरफ्तारी से बचाव के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
हाईकोर्ट ने 9 जून 2025 को सुबह 11:30 बजे तक जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का स्पष्ट आदेश दिया था। इसके बावजूद ओमप्रकाश गर्ग अब तक पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है। यह स्पष्ट रूप से न्यायालय के आदेश की अवहेलना है।
किशन सालवी आत्महत्या मामला: पूरा घटनाक्रम
कोशीथल निवासी किशन सालवी ने 4 फरवरी 2025 को जहरीला पदार्थ पीने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके पास से एक सुसाइड नोट और निजी डायरी बरामद हुई थी, जिसमें उसने आत्महत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के नाम लिखे थे।
सुसाइड नोट में जिन व्यक्तियों के नाम हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- अनिताराज (दिल्ली, जुगनपुरा)
- ओमप्रकाश गर्ग (नगरी, चित्तौड़गढ़)
- मुकेश गर्ग (ओमप्रकाश का पुत्र)
- चंदन गर्ग
ऐसे की गई थी किशन सालवी के साथ ठगी
सुसाइड नोट के अनुसार, किशन सालवी को ओमप्रकाश गर्ग ने बेंगलुरु बुलाया था। वहां व्यवसाय में निवेश के बदले तीन गुना लाभ का झांसा दिया गया। किशन ने 7 लाख से अधिक की राशि एकत्रित कर 15 जनवरी 2024 को बेंगलुरु पहुंचा, जहां एक होटल में उसका परिचय कराया गया:
- अनिताराज (मंथन संस्थान, दिल्ली की कथित सचिव)
- ओमप्रकाश गर्ग
- दिल्ली के ओमप्रकाश
- कपासन के अशोक कुमार
किशन 15 से 26 जनवरी तक होटल में उनके साथ रुका और इस दौरान उससे 6 लाख 91 हजार 900 रुपये वसूले गए।
डेविड नामक व्यक्ति की फर्जी कहानी से किया गया गुमराह
25 जनवरी को किशन को बताया गया कि डेविड नामक फंडर मुंबई से पैसा लेकर आने वाला है, लेकिन फिर कहानी गढ़ी गई कि डेविड का अपहरण हो गया है और मुंबई एयरपोर्ट पर भारी कैश मिलने के कारण पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है। इसके बाद सभी लोगों ने होटल छोड़कर फरार होने की योजना बनाई।
26 जनवरी 2024 को सभी आरोपी अलग-अलग फ्लाइट से अपने गंतव्य लौट गए, और किशन ठगा सा रह गया।
आत्महत्या से पहले किशन की चेतावनी: पैसे नहीं मिले तो मर जाऊंगा
3 फरवरी 2025 को किशन ने ओमप्रकाश गर्ग को फोन कर अंतिम बार कहा था कि यदि उसे पैसा वापस नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगा। लेकिन आरोपी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अगले दिन, यानी 4 फरवरी को किशन सालवी ने जान दे दी। यह पूरा घटनाक्रम सुसाइड नोट और डायरी में विस्तार से दर्ज है, जो पुलिस की जांच का हिस्सा है।
संगठित गिरोह द्वारा युवाओं से करोड़ों की ठगी का आरोप
परिवादी लखन सालवी ने बताया कि यह केवल किशन के साथ हुई एकल ठगी नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह है जो चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और अन्य जिलों के युवाओं को फर्जी व्यवसाय का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीआईडी (सीबी) को जांच सौंपने की मांग की थी। पुलिस ने इसे स्वीकारते हुए मामला सीआईडी-सीबी को ट्रांसफर कर दिया है और जांच प्रगति पर है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अनिताराज गिरफ्तार हो चुकी है और उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
ओमप्रकाश गर्ग हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस के समक्ष पेश नहीं हुआ, जिससे उसका फरार होना लगभग स्पष्ट है। सीआईडी-सीबी मामले की जांच कर रही है, और सूत्रों के अनुसार जल्द ही अन्य आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सकता है।
न्याय की ओर एक और कदम, लेकिन अभी लंबा रास्ता बाकी
किशन सालवी की आत्महत्या की कहानी एक आम युवा की पीड़ा और संगठित ठगों की चालाकियों को उजागर करती है। न्यायपालिका और पुलिस ने अब तक तेज़ी से कार्य किया है, लेकिन जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होते और गिरोह का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक यह मामला अधूरा रहेगा।













