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गणेशोत्सव को अधार्मिकता से मुक्त कर राष्ट्रजागरण का पर्व बनाएं – हिन्दू जनजागृति समिति का अभियान

लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक ने जिस उद्देश्य से सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी, वह उद्देश्य था – हिन्दू समाज में संगठन, राष्ट्रप्रेम और धर्मप्रेम को जागृत करना। परंतु आज, समय के साथ इस उत्सव की पवित्रता पर अनेक अधार्मिक और भौतिकवादी कुप्रथाएं हावी हो गई हैं। कहीं पंडालों में जुआ और ताश के खेल हो रहे हैं, तो कहीं फिल्मी गीतों और तामसी कार्यक्रमों के नाम पर श्रीगणेश का अनादर हो रहा है।

इसी पृष्ठभूमि में हिन्दू जनजागृति समिति ने यह प्रण लिया है कि इस वर्ष का गणेशोत्सव सात्विकता, राष्ट्रभक्ति और धर्मशिक्षा का सशक्त माध्यम बनेगा।

इस बार का प्रण – आदर्श गणेशोत्सव

  • 🚫 पंडाल में जुआ, ताश या अश्लील नृत्य नहीं होगा!
    ✅ राष्ट्रजागृति, इतिहास बोध और धर्मशिक्षा आधारित विषयों पर प्रदर्शनी और व्याख्यान होंगे।
  • 🚫 बॉलीवुड गानों पर आधारित संगीत और नृत्य कार्यक्रम नहीं होंगे!
    ✅ युवतियों को स्वरक्षा प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा के संस्कार दिए जाएंगे।
  • 🚫 विचित्र, भव्य और भारी-भरकम मूर्तियां नहीं होंगी!
    ✅ मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी शास्त्रसम्मत मूर्तियों की स्थापना की जाएगी।
  • 🚫 शराब, तामसी गानों और देर रात तक चलनेवाली शोभायात्राओं से परहेज़ किया जाएगा!
    ✅ नामजप करते हुए समय पर समाप्त होनेवाली शोभायात्रा का आयोजन होगा।

पर्यावरण रक्षा के नाम पर ढोंगी आक्रमण का विरोध

समिति ने तथाकथित पर्यावरणवादियों और एनजीओ द्वारा हिन्दू पर्वों को विशेष रूप से निशाना बनाने की प्रवृत्ति का विरोध किया है। वर्षभर पर्यावरण पर मौन रहनेवाले ये तत्व केवल हिन्दू उत्सवों के समय ही सक्रिय होते हैं, और पारंपरिक धार्मिक आस्थाओं को नष्ट करने के लिए कृत्रिम तालाब, मूर्ति दान तथा रसायन में विसर्जन जैसे अधार्मिक विकल्पों को बढ़ावा देते हैं।

परंतु समिति का कहना है कि:

  • मूर्ति का विसर्जन शास्त्रसम्मत रूप से बहते जल में होना चाहिए, जिससे आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

  • मूर्ति दान करना या रसायनों में घोलना देवता का अपमान है और इससे श्रद्धा का नाश होता है।

  • एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्टों के अनुसार कागज की लुगदी और पीओपी की मूर्तियां पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक हैं।

हिन्दू जनजागृति समिति के अभियान की मुख्य गतिविधियां:

  • मूर्तिकारों व मंडलों में जागरूकता – मिट्टी की मूर्तियां बनाने और उपयोग को बढ़ावा।
  • व्याख्यान, चर्चा व प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजागरण।
  • सोशल मीडिया पर जागृति अभियान – #AdarshGaneshotsav #BadlaavHumLayenge
  • सरकारी अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अधार्मिक ‘मूर्ति दान’ और कृत्रिम तालाब पर प्रतिबंध की मांग।
  • पुलिस प्रशासन के साथ सहयोग कर विसर्जन की व्यवस्था।
  • श्रद्धालुओं को सात्विक विसर्जन विधियों के लिए प्रेरित करना।

श्रद्धालुओं से समिति की अपील:

हिन्दू जनजागृति समिति सभी श्रद्धालुओं से निवेदन करती है कि वे इस वर्ष से संकल्प लें:

✅ मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्ति की ही स्थापना करूंगा।
✅ विचित्र व भव्य मूर्तियों से परहेज़ करूंगा।
✅ परंपरागत वस्त्र धारण करूंगा, सात्विक भजन व मंत्रों का आयोजन करूंगा।
✅ शास्त्रसम्मत रूप से बहते जल में ही मूर्ति का विसर्जन करूंगा।
✅ श्रीगणेश का अपमान करनेवाली प्रथाओं का कानूनी मार्ग से विरोध करूंगा।
✅ सच्चे गणेशभक्त बनकर आदर्श गणेशोत्सव मनाऊंगा।

गणेशोत्सव केवल उत्सव नहीं – यह धर्मजागरण का पर्व है!

गणेशोत्सव की पवित्रता और परंपरा की रक्षा करना हर हिन्दू का कर्तव्य है। जब तक हम धर्म पर डटे रहेंगे, तभी राष्ट्र मजबूत होगा। इसीलिए इस वर्ष का नारा है –

“आदर्श गणेशोत्सव मनाएंगे – #BadlaavHumLayenge”  गणेशोत्सव की सात्विकता और पवित्रता संजोए रखने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति के अभियान में सम्मिलित हों!

न्यूज़ डेस्क

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