घरेलु कलह से करावल नगर का बिखरा परिवार: पति ने पत्नी और दो मासूम बेटियों को मारकर खुद की दुनिया उजाड़ दी

घरेलु कलह से त्योहार की सुबह मातम में बदली – दिल्ली का करावल नगर, जहाँ रक्षाबंधन की सुबह घर-घर में बहनें भाइयों को राखी बांधने की तैयारी कर रही थीं, वहीं एक घर से ऐसी चीखें उठीं जिन्होंने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। शनिवार, 9 अगस्त 2025 की सुबह 7 बजे के आसपास, शहीद भगत सिंह कॉलोनी में रहने वाले प्रदीप कश्यप (29) ने अपनी पत्नी जयश्री (28) और दो बेटियों इशिका (7) व अन्तू (5) की गला दबाकर हत्या कर दी।
सुबह का खौफनाक दृश्य – पड़ोसियों ने बताया कि घर से अजीब-सी हलचल और रोने की आवाजें आ रही थीं। जब अंदर झाँका गया तो तीनों शव कमरे में पड़े थे। त्योहार की रौनक देखते ही देखते मातम में बदल गई। मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई और लोग विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि एक बाप अपनी ही बच्चियों के साथ इतनी क्रूरता कर सकता है।
घरेलू कलह और अविश्वास बना वजह
जांच में सामने आया कि प्रदीप और जयश्री के बीच लंबे समय से झगड़े हो रहे थे। प्रदीप की शराब और जुए की लत, आर्थिक तंगी और पत्नी पर अविश्वास ने रिश्ते को गहराई से तोड़ दिया। कई बार जयश्री मायके जाने की बात करती थी, लेकिन बच्चों के कारण वहीं रुक जाती थी। पुलिस का मानना है कि लगातार झगड़ों और शक ने प्रदीप को इस हद तक पहुँचा दिया कि उसने पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया।
गिरफ्तारी और कबूलनामा – हत्या के बाद प्रदीप घर से फरार हो गया था। लेकिन कुछ ही घंटों में पुलिस ने उसे मुक़ुन्द विहार इलाके से पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करते हुए कहा—
“गुस्से में आकर मैंने सब कुछ खत्म कर दिया। बाद में खुद भी जान देने का सोचा, लेकिन हिम्मत नहीं हुई।”
मायके वालों का दर्द – जयश्री का भाई चंद्रभान फूट-फूटकर रोते हुए कहता है—
“हमने बहन को कई बार समझाया कि यहां मत रहो, लेकिन वह बच्चों के खातिर पति के साथ ही रही। हमें नहीं पता था कि राखी के दिन ही उसकी और भांजियों की डोर काट दी जाएगी।”
पड़ोसियों की गवाही – मोहल्ले वालों के अनुसार प्रदीप और जयश्री के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे। कई बार लोग बीच-बचाव भी करते थे, लेकिन हालात सुधरने की बजाय और बिगड़ते चले गए। पड़ोसी कहते हैं कि बच्चियाँ हमेशा चुपचाप रहती थीं, शायद घर के माहौल का असर उन पर पड़ रहा था।
समाज के लिए सवाल – यह घटना सिर्फ़ एक घर की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल है—क्या रिश्तों में अविश्वास और कलह इतनी खाई पैदा कर सकती है कि इंसान अपनी ही संतान का गला घोंट दे? त्योहार, जो परिवार और रिश्तों को जोड़ने के लिए होते हैं, उसी दिन करावल नगर का यह घर हमेशा के लिए उजड़ गया।













