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घुमंतू पशु पकड़ो अभियान ‘पंचर’, सुमेरपुर की सड़कों पर मवेशियों का आतंक—पालिका खुद बनी लापरवाही की मिसाल

नंदी शाला होने के बावजूद सड़कों पर डेरा, हादसों का खतरा बढ़ा—जनता में रोष, जिम्मेदार मौन


  • रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर

सुमेरपुर। शहर में घुमंतू पशुओं को पकड़ने का अभियान पूरी तरह से “पंचर” साबित हो चुका है। नगर की लगभग हर मुख्य और आंतरिक सड़क पर मवेशियों का कब्जा नजर आ रहा है, जिससे आमजन का निकलना तक दूभर हो गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अब लोग यह कहने लगे हैं कि “पालिका प्रशासन खुद ही आवारा हो गया है”, जिसे न शहर की सुरक्षा की चिंता है और न ही व्यवस्था बनाए रखने की।

नगरपालिका द्वारा बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि घुमंतू पशुओं को पकड़कर नंदी शाला में भेजा जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। नंदी शाला होने के बावजूद सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा प्रशासन की नाकामी को उजागर कर रहा है। दिन हो या रात, बाजार, चौराहे और मुख्य मार्गों पर पशुओं का जमघट लगा रहता है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।

हादसों का बढ़ा खतरा, जिम्मेदार बेखबर

सड़कों पर बैठे और अचानक दौड़ते पशु आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक और राहगीर खासतौर पर भय के साये में जी रहे हैं। कई बार मामूली दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं लिया।

कागजों में सीमित अभियान, धरातल पर फेल

पालिका की ओर से चलाया गया घुमंतू पशु पकड़ो अभियान अब केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहा है,यही नहीं हर बार केवल औपचारिकता पूरी की जाती हैं।
अभियान की शुरुआत में कुछ दिन दिखावा जरूर किया गया, लेकिन उसके बाद पूरी तरह ढील दे दी गई। न तो नियमित रूप से पशुओं को पकड़ा जा रहा है और न ही उनके मालिकों पर कोई कार्रवाई हो रही है।

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जनता में आक्रोश, उठ रहे सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब नंदी शाला पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, तो फिर पशु सड़कों पर क्यों घूम रहे हैं? आखिर जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी? शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। न तो कोई ठोस योजना नजर आ रही है और न ही समस्या के समाधान के प्रति गंभीरता। हर बार दिखावा किया जाता है। इस लिपापोती के कारण शहर की एक भी सड़क सुरक्षित नहीं है,जहां देख वहां बेजुबान पशुओं का झुंड की झुंड नज़र आता है।

आंखों पर जिम्मेदारों ने बांधी पट्टी

गौरतलब है कि सबसे व्यस्ततम एवं भीडभाड़ वाला मुख्य सड़क जवाई बांध रोड से बड़े-बड़े अधिकारियों के साथ जन्म प्रतिनिधियों का कई बार आवागमन होता है फिर भी उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी है। उन्हें सड़क पर पशुओं का झुंड नज़र नहीं आता है। वे अपनी मस्ती में गाड़ी में बैठकर चल पड़ते हैं। ऐसे और
पाली बस स्टैंड रोड,आर्य समाज रोड, खेड़ा देवी रोड कोलीवाडा रोड, मोक्ष धाम रोड, जालौर चौराहा रोड आदि पर स्थिति इस कदर हो गई है जहां कई बार लड़ने से लोगों को नुकसान हुआ है। फिर भी पालिका प्रशासन मुंह मार कर किसी बड़े हादसे के इंतजार में है।

सुमेरपुर में घुमंतू पशुओं का बढ़ता आतंक अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर जनसुरक्षा का मुद्दा बन चुका है। यदि प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

न्यूज़ डेस्क

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