जलसंसाधन के अफसर सोते रहे, इतने समय में तो भर जाते वल्लभनगर और बड़गांव बांध

रिपोर्टर - सत्यनारायण सेन गुरला
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खाली है और गुजरात जाएगा पानी
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आकोदड़ा से ही मानसी वाकल भरना था तो उसी की नदी पर आकोदड़ा बनाया क्यों
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मादड़ी बांध और देवास प्रथम का पानी भी ला सकते थे उदयपुर
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बड़गांव के बाद घोसूंडा बांध को भी भर सकते थे
379 करोड़ के देवास प्रोजेक्ट-2 के तहत बनाया गया आकोदड़ा बांध ओवरफ्लो हो गया। इसका पानी मानसी वाकल बांध में जा रहा है। मानसी वाकल बांध सिर्फ 20 सेंटीमीटर ही खाली है। मानसी वाकल बांध के गेट भी कभी भी खोलने पड़ सकते है और गेट खोलते ही मेवाड़ के हक का पानी सीधा गुजरात जाएगा। अधिकारी अब भले ही आकोदड़ा बांध का पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर भी दे तो बहुत देरी हो चुकी होगी। Dewas Project Akodara
Madari Dam udaipur
यह स्थिति तब है जब वल्लभनगर बांध खाली पड़ा है। इसके आगे बड़गांव बांध और उसके बाद घोसूंडा बांध भी खाली है। दिन भर एसी चैंबर में बैठकर मंथन करने वाले जलसंसाधन विभाग के स्थानीय अधिकारी थोड़े भी संवेदनशील होकर समय रहते टनल से आकोदड़ा और मादड़ी बांध का पानी उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर देते तो आज यह स्थिति नहीं बनती। यहां के कमांड एरिया को किसानों को सिंचाई के लिए जरूरत अनुसार पानी मिलने के साथ ही क्षेत्र के भूजल स्तर में भी सुधार आता। Dewas Project Akodara Madari Dam udaipur
वल्लभनगर बांध अभी भी क्षमता के मुकाबले 54.71 प्रतिशत ही भरा
जलसंसाधन विभाग के अधिकारी उन्हीं के विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष की नियमित रिपोर्ट भी गंभीरता से देख लेते तो ध्यान में रहता कि वल्लभनगर बांध का जलस्तर 19.50 फीट के मुकाबले 13.3 फीट ही हुआ है। यानी वल्लभनगर बांध अभी भी क्षमता के मुकाबले 54.71 प्रतिशत ही भरा है। यह समय रहते भर जाता तो इसका पानी मावली क्षेत्र के बड़गांव बांध को भरता।
बड़गांव बांध का जलस्तर 7.62 मीटर के मुकाबले 4.69 मीटर ही हुआ है। यानी बड़गांव बांध को भी भरने के लिए अभी काफी पानी की जरूरत है। बड़गांव बांध समय पर भर जाता तो इसके पानी से चित्तौड़ क्षेत्र का घोसूंडा बांध भी अभी काफी भर सकता था। घोसूंडा बांध का जलस्तर 423 आरएलमीटर के मुकाबले 419.35 आरएलमीटर ही हुआ है। यानी इस बांध को भी अभी काफी पानी की जरूरत है।
बहुत कम खाली है मादड़ी बांध, मानसी वाकल होते
हुए इसका पानी भी गुजरात जाएगा
मादड़ी बांध भी 34 फीट के मुकाबले 27.6 फीट भर चुका है। यह ओवरफ्लो हुआ तो इसका पानी भी मानसी वाकल जाएगा। इधर देवास प्रथम बांध (अलसीगढ़ बांध) 34 फीट के मुकाबले 29 फीट भर चुका है। ओवरफ्लो होने पर यह पानी भी सीधा गुजरात जाएगा। ऐसे में अधिकारी चाहते तो समय पर आकोदड़ा के साथ ही मादड़ी और देवास प्रथम (अलसीगढ़ बांध) का पानी पहले यहां की जरूरतों को पूरा कर सकते थे। भी इतने दिनों में उदयपुर की झीलों में डायवर्ट कर सबसेआकोदड़ा से ही मानसी वाकल भरना था, तो उसी की नदी पर आकोदड़ा बनाया क्यों
मानसी वाकल बांध भी उदयपुर शहर की करीब 100 कॉलोनियों में पेयजल व्यवस्था के काम आता है, लेकिन सवाल यह है कि मानसी वाकल बांध को आकोद्ड़ा बांध से ही भरना था तो इस नदी में पानी रोकने के लिए आकोदड़ा बांध बनाने की क्या जरूरत पड़ी मानसी वाकल बांध तो नदी से आने वाले पानी से वैसे ही भरता रहता। देवास प्रोजेक्ट-2 के अन्तर्गत 302 एमसीएफटी भराव क्षमता का बांध बनाकर 11.5 किलोमीटर लंबी टनल (सुरंग) का निर्माण किया गया। साथ ही 85 एमसीएफटी भराव क्षमता का मादडी बांध बनाकर 1.21 किलोमीटर की सुरंग को आकोदडा की मुख्य सुरंग से जोडा गया था। यह कवायद उदयपुर की झीलों को भरने के लिए की गई थी।
देवास प्रोजेक्ट बनाने का मकसद यही था कि मानसून सीजन में पीछोला और फतहसागर भरने के बाद उदयसागर और वल्लभनगर बांध को भी भरा जा सके। इसके बाद भी पानी की अतिरिक्त उपलब्धता होने पर वल्लभनगर बांध के बाद मावली क्षेत्र में स्थित बड़गांव बांध भी भरा जा सके।











