तिलका मांझी जयंती पर उमड़ा जनसैलाब | टुण्डी धनबाद में भव्य समारोह | मीना हेंब्रम का संबोधन

अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में प्राण निछावर करने वाले तिलका मांझी की जन्म दिवस पर उमड़ी भीड़।
ऐसे स्वतंत्रता सेनानी की बलिदान झारखंड रखेगा हमेशा याद – मीना हेंब्रम जिलाध्यक्षा।
टुण्डी/ धनबाद।
टुण्डी : प्रखंड मुख्यालय से सटे कर्माटांड़ तिलका मांझी चौक पर आज़ बुधवार को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने वाले वीर शहीद तिलका मांझी का उनके जन्मदिन पर झामुमो महिला मोर्चा जिलाध्यक्षा सह जिला परिषद सदस्या मीना हेंब्रम ने नगाड़ों एवं मांदर के थाप पर आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर पूरे धूमधाम से मनाया और कहा कि ऐसे वीर सपूत की बलिदान कभी बेकार नहीं जाएगी और झारखंड हमेशा उनकी शहादत को याद करेगा।
ज्ञात हो कि आज़ टुण्डी प्रखंड के कर्माटांड़ गांव के बीच चौराहे पर स्थित तिलका मांझी का आदमकद प्रतिमा का अनावरण को लेकर आदिवासी भाई बहनों ने जबरदस्त तरीके से उनके जन्मदिन को मनाया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति पेश करते हुए नृत्य किया।
झामुमो जिलाध्यक्षा को आदिवासी बहनों के द्वारा अंगवस्त्र एवं फूलमालाओं से सम्मान एवं आदरपूर्वक भव्य स्वागत किया।

ऐतिहासिक संदर्भ
सभी आदिवासी समुदायों के बीच उपस्थित मीना हेंब्रम ने दोहराया कि 13 जनवरी 1785 को अंग्रेजों द्वारा भागलपुर में एक बरगद के पेड़ पर वीर स्वतंत्रता सेनानी को फांसी दे दी गई थी जब वे 1784 के आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने क्लेक्टर आगस्टस क्लीवलैंड की हत्या की थी।
उन्हें फांसी देने से पहले घोड़ों से घसीटा गया तिलका मांझी ने 1780 -85 के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया जिसे भारत के पहले सशस्त्र आदिवासी विद्रोहों में से एक माना जाता है।
आगे मीना हेंब्रम ने बताया कि 1857 के विद्रोह से काफी पहले अंग्रेजों का विरोध उनके द्वारा किया गया था जो आज़ भी लोगों के ज़ेहन में है।
उपस्थित प्रमुख लोग
आज़ के समारोह में मुख्य रूप से जिलाध्यक्षा मीना हेंब्रम, मुखिया प्रतिनिधि आज़ाद अंसारी, मांझी हडा़म मुंशी बेसरा, नाईकी हडा़म बिनोद टुडू, एतवारी सोरेन, बाबुजान सोरेन, वीरालाल हांसदा, साहेब किस्कू, अनिल सोरेन, समेत बड़ी संख्या में तिलका मांझी समर्थक उपस्थित थे।














