दिल्ली का शर्मनाक मामला: बेटे ने बुजुर्ग मां के साथ बलात्कार कर कहा – “यह तुम्हारी सजा है
दिल्ली के हौज काजी इलाके में एक 39 वर्षीय बेटे ने अपनी 65 वर्षीय मां के साथ दो बार बलात्कार किया और इस घिनौने अपराध को उसने "सजा" बताया। यह मामला 17 अगस्त 2025 को सामने आया, जब पीड़िता अपनी 25 वर्षीय बेटी के साथ पुलिस थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया ।

दिल्ली के हौज काजी इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज को हिलाकर रख दिया है। 17 अगस्त 2025 को एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला अपनी 25 वर्षीय बेटी के साथ पुलिस थाने पहुंची और अपने ही बेटे के खिलाफ बलात्कार की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 39 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत मामला दर्ज किया।
पीड़िता एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी की पत्नी हैं जो अपने पति, आरोपी बेटे और छोटी बेटी के साथ हौज काजी में रहती थीं। उनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है जो पास के ही मोहल्ले में रहती है। घटना की शुरुआत तब हुई जब 17 जुलाई 2025 को पीड़िता अपने पति और छोटी बेटी के साथ हज यात्रा पर सऊदी अरब गईं। यात्रा के दौरान ही आरोपी बेटे ने अपने पिता को बार-बार फोन करके उन्हें वापस बुलाया और मां को तलाक देने की मांग की।
आरोपी को यह शक था कि कई साल पहले, जब वह छोटा था, उसकी मां ने किसी अन्य पुरुष के साथ विवाहेतर संबंध बनाए थे। इसी संदेह के आधार पर उसने मां को “सजा” देने का फैसला किया। 1 अगस्त को जब परिवार दिल्ली लौटा तो आरोपी ने मां का बुर्का उतरवाकर उनकी पिटाई की और एक कमरे में बंद कर दिया। इस घटना के बाद पीड़िता घर छोड़कर अपनी बड़ी बेटी के पास चली गईं।
11 अगस्त को जब मां घर वापस लौटी तो रात करीब 9:30 बजे आरोपी ने उन्हें कमरे में बंद करके पहली बार बलात्कार किया। इस दौरान उसने कहा कि यह उनके “पापों की सजा” है। सदमे और शर्म की वजह से पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई और अपनी बेटी के कमरे में सोने लगीं। लेकिन 14 अगस्त की सुबह करीब 3:30 बजे आरोपी ने फिर से कमरे में घुसकर मां का यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद पीड़िता ने अपनी छोटी बेटी को सारी बात बताई और दोनों मिलकर पुलिस थाने पहुंच गईं।
पुलिस ने तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान पुलिस आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक झगड़ों के बारे में भी पड़ताल कर रही है। यह मामला मां-बेटे के पवित्र रिश्ते को कलंकित करने वाला बताया जा रहा है। महिला अधिकार संगठनों ने पीड़िता के लिए कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य की जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
इस घटना ने न केवल पारिवारिक विकृति को उजागर किया है, बल्कि समाज और कानून व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। पुलिस और समाज को ऐसे संवेदनशील मामलों में विशेष सावधानी और संवेदनशीलता से काम लेने की आवश्यकता है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में नैतिक मूल्यों का कितना ह्रास हो चुका है और हमें इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।













