दिल्ली ब्लास्ट केस: डॉक्टरों के व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क का भंडाफोड़, इमाम इरफ़ान वगय मास्टरमाइंड; रिमांड चार दिन बढ़ी

नई दिल्ली | अपडेट: 9 दिसंबर 2025
दिल्ली में हुए ब्लास्ट और फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने के मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। अदालत ने तीन डॉक्टरों और एक प्रचारक की पुलिस रिमांड को चार दिन और बढ़ाया है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क को कश्मीर के शोपियां निवासी इमाम इरफ़ान अहमद वगय संचालित कर रहा था, जिसने मेडिकल पेशे से जुड़े युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़कर आतंक गतिविधियों में शामिल किया।
- इमाम इरफ़ान वगय नेटवर्क का मुख्य प्रवर्तक
- डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित किया गया
- फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक और हथियार बरामद
- कश्मीर, हरियाणा और यूपी तक फैला संगठित नेटवर्क
- पोस्टरों से शुरू हुई जांच ब्लास्ट मॉड्यूल तक पहुंची
कौन है इरफ़ान अहमद वगय
जांच एजेंसियों के अनुसार:
- पेशे से इमाम और पैरामेडिकल पृष्ठभूमि का होने के कारण वह मेडिकल पेशेवरों तक आसानी से पहुंच रखता था।
- मस्जिद में दिए भाषण, व्यक्तिगत मुलाकातें और गुप्त बैठकों के जरिए डॉक्टरों और छात्रों को प्रभावित करता था।
- कट्टरपंथी सामग्री, वीडियो और संदेशों का इस्तेमाल कर युवाओं को नेटवर्क में शामिल करता था।
एजेंसियों का दावा है कि इरफ़ान सिर्फ प्रचारक नहीं, बल्कि इस पूरे मॉड्यूल का ऑपरेशनल प्लानर था।
कैसे सामने आया नेटवर्क
- 19 अक्टूबर को श्रीनगर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन वाले पोस्टर मिले।
- डिजिटल जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पता चला कि इसमें मेडिकल सेक्टर के लोगों की भूमिका है।
- जांच दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद मॉड्यूल तक पहुंच गई, जहां से आतंक नेटवर्क की पूरी संरचना उजागर हुई।
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छापेमारी के दौरान पुलिस ने:
- 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री
- हथियारों का जखीरा
- टाइमिंग डिवाइस, डेटोनेटर, रिमोट सिस्टम
- बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए।
अधिकारियों के मुताबिक इतनी मात्रा किसी बड़े आतंकी प्लान की ओर इशारा करती है।
कौन-कौन गिरफ्तार
अब तक गिरफ्तार लोगों में:
- डॉ. मुजम्मिल शाकिर
- डॉ. अदील अहमद
- डॉ. उमर-उन-नबी
- प्रचारक इरफ़ान अहमद वगय
शामिल हैं। इनके डिजिटल डिवाइस से मिले डेटा ने नेटवर्क की गतिविधियों की पुष्टि की है।
जांच की वर्तमान स्थिति
- पुलिस को रिमांड अवधि बढ़ाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कई डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डेटा, फंडिंग स्रोत और संपर्कों की जांच अभी अधूरी है।
- मेडिकल काउंसिल ने कुछ डॉक्टरों के लाइसेंस स्थगित कर दिए हैं, बाकी मामलों में कार्रवाई जारी है।
- सुरक्षा एजेंसियाँ अब नेटवर्क की फंडिंग, विदेशी कनेक्शन और सप्लाई चैन पर ध्यान दे रही हैं।
केंद्र और राज्य स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों को हाई-अलर्ट पर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के पेशेवर आतंक मॉडल को जड़ से खत्म करने के लिए सख्ती बढ़ाई जाएगी।












