दुनिया की ऊर्जा संक्रमण सूची में भारत: स्थिति, चुनौतियाँ और मौक़े

नई दिल्ली | 15 अगस्त 2025 — वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम (WEF) द्वारा 18 जून 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट “Fostering Effective Energy Transition 2025” के अनुसार, Energy Transition Index (ETI) 2025 में भारत 71वें स्थान पर आया है। यह पिछली रैंकिंग (2024 में 63वां स्थान) से 8 पायदान नीचे है, बावजूद इसके देश ने बड़े अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ सुधार भी दर्ज किए हैं। भारत का कुल स्कोर 53.3 है, जिसमें सिस्टम परफ़ॉर्मेंस — 60.4 और ट्रांज़िशन रीडिनेस — 42.7 शामिल है।
वैश्विक संदर्भ: कौन हैं टॉप, और भारत कहां है?
| रैंक | देश | स्कोर (ETI 2025) |
|---|---|---|
| 1 | स्वीडन | 77.5 |
| 2 | फिनलैंड | 71.8 |
| 3 | डेनमार्क | 71.6 |
| … | … | … |
| 71 | भारत | 53.3 |
दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चीन ने 12वां स्थान हासिल किया, जबकि अमेरिका 17वें पर रहा।
भारत की खूबियाँ (स्ट्रेंथ)
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ऊर्जा दक्षता में सुधार — कम ऊर्जा इन्टेंसिटी और CH₄ उत्सर्जन।
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नियमों में सुधार और निवेश क्षमता में उन्नति, विशेषकर क्लीन एनर्जी क्षेत्रों में।
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शुद्ध ऊर्जा पहुँच और स्वच्छ ईंधन की ग्रामीण स्तर तक बेहतर उपलब्धता।
भारत के सामने चुनौतियाँ (वीकनेस)
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ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और ग्रिड की विश्वसनीयता (Grid Reliability) कमजोर।
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ट्रांज़िशन तैयारियों (Transition Readiness) जैसे पॉलिटिकल कमिटमेंट, नवाचार, विनियामक ढांचा, मानव संसाधन—इन क्षेत्रों में अभी दूरी है।
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आयात निर्भरता और बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी भी चिंता का विषय हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रवृत्ति और भारत का महत्व
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77 देशों में कुल मिलाकर स्कोर सुधरे।
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केवल 28% देशों ने सुरक्षा, स्थिरता और समानता (Equity) तीनों आयामों में उन्नति दिखाई।
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रिपोर्ट में एक बार फिर स्पष्ट किया गया कि वैश्विक संक्रमण की गति अभी असंतोषजनक है, और अधिक राजनीतिक प्रतिबद्धता और निवेश जरूरी हैं।
आगे का रास्ता (नीति सुझाव)
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ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण ऊर्जा पहुंच पर तेजी से निवेश।
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प्रतिस्थापन रणनीतियाँ — ऊर्जा आयात कम करने और घरेलू अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर।
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रीडिनेस बढ़ाने के लिए शिक्षा, नवोन्मेष, वित्तीय सहायक रूपरेखा और मजबूत नियामक सुधारों को प्राथमिकता दें।
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अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी — तकनीकी हस्तांतरण और निवेश को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है।
भारत ने ऊर्जा संक्रमण के क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण सुधार तो किए हैं — खासकर दक्षता, नवीकरणीय निवेश और ग्रामीण ऊर्जा पहुंच में। लेकिन ग्लोबल स्लॉट में नौवीं पायदान की गिरावट यह इंगित करती है कि सुरक्षा, भरोसेमंद ग्रिड, नरमीपूर्ण नीति और तैयारियाँ अभी अधूरी हैं। घरेलू स्तर पर रणनीति और वैश्विक सहयोग इस संक्रमण को तेज और कारगर बना सकते हैं।













