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नववर्ष पर प्रसिद्ध मंदिरों व पिकनिक स्थलों पर उमड़ी भारी भीड़, पैदल चलना भी हुआ मुश्किल

  • भीलवाड़ा।

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भीड़भाड़ से दूर गुरला का कालिका माता मंदिर बना सुकून भरा विकल्प

नववर्ष के स्वागत को लेकर देशभर में उत्साह चरम पर है। साल के अंतिम दिन और नए साल के पहले दिन से पहले ही प्रसिद्ध मंदिरों और पिकनिक स्थलों पर श्रद्धालुओं व पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जगहों पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो हर बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थल पर अघोषित मेला लग गया हो।

रविवार को जहां प्रमुख स्थलों के हर कोने में जबरदस्त रेलमपेल देखने को मिली, वहीं सोमवार को भी दिनभर रौनक बनी रही। भीड़ के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या आम हो गई। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए अनेक प्रसिद्ध मंदिरों में वीआईपी पास व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। कुछ स्थानों पर तो 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक आम श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए न आने की सलाह भी दी जा रही है।

भीड़ से दूर सुकून की तलाश में गुरला कालिका माता मंदिर

ऐसे में जो लोग नववर्ष शांति और प्रकृति के बीच मनाना चाहते हैं, उनके लिए भीलवाड़ा जिले से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित गुरला का कालिका माता मंदिर एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है।

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हरी-भरी पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर दूर-दूर तक फैले मनमोहक दृश्यों के लिए जाना जाता है। दिसंबर माह में समीप स्थित रणजीत सागर तालाब के ओवरफ्लो पानी की चादर पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। शांत वातावरण, खुली हवा और प्राकृतिक हरियाली के बीच यह स्थान नववर्ष मनाने वालों के लिए भीड़भाड़ से दूर सुकून देने वाला अनुभव प्रदान करता है। यहां सेल्फी प्वाइंट भी मौजूद हैं, जहां लोग सहजता से यादगार तस्वीरें कैद कर सकते हैं।

राजस्थान में बाहरी राज्यों से बढ़ी युवा वर्ग की आवक

नववर्ष के अवसर पर राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों और पिकनिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों में बड़ी संख्या युवा वर्ग की है। अनुमान के अनुसार करीब 80 प्रतिशत लोग 45 वर्ष से कम आयु के हैं। इनमें राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आए पर्यटक भी शामिल हैं।

युवा वर्ग में धार्मिक दर्शन के साथ-साथ प्राकृतिक और शांत स्थलों की ओर रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि गुरला कालिका माता मंदिर जैसे नए और अपेक्षाकृत शांत दर्शनीय स्थल नववर्ष पर लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर प्रसिद्ध स्थलों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था लोगों की परेशानी बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर गुरला जैसे स्थल शांति, प्रकृति और आस्था का संतुलित अनुभव प्रदान कर रहे हैं। नववर्ष को सादगी और सुकून के साथ मनाने वालों के लिए यह स्थान एक सार्थक विकल्प साबित हो रहा है।

न्यूज़ डेस्क

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