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नाली बंद, गंदगी सड़क पर… जिम्मेदार बेपरवाह! सुमेरपुर के वार्ड-3 में हालात बेकाबू, बीमारी का खतरा बढ़ा

शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, कॉलोनीवासी बोले—“अब सहन नहीं होगा, जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन”


  • रिपोर्ट – पुखराज कुमावत सुमेरपुर 

सुमेरपुर (पाली) |  नगर पालिका सुमेरपुर की लापरवाही एक बार फिर आमजन पर भारी पड़ रही है। वार्ड संख्या 03 की गोविंद सागर कॉलोनी और शिव वाटिका क्षेत्र में नाली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिसके चलते गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और क्षेत्र में बदबू व गंदगी का आलम है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यहां बीमारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत देकर स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन कई दिनों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि नाली का निर्माण अधूरा और गलत दिशा में किया गया, जिससे पानी का निकास नहीं हो पा रहा है और गंदा पानी रास्तों पर फैल रहा है।

इन लोगों ने उठाई आवाज

शिकायत पत्र में कॉलोनी के कई लोगों ने अपने हस्ताक्षर कर प्रशासन को चेताया है। इनमें प्रमुख रूप से शिवलाल कुमावत, ईश्वर राम देवासी, पप्पूलाल कुमावत, बाबूलाल सुथार, नथमल प्रजापत सहित अन्य स्थानीय नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने स्पष्ट रूप से समस्या के समाधान की मांग की है।

“नाली बनी, पर काम की नहीं!”

लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने नाली तो बनाई, लेकिन उसका लेवल और दिशा सही नहीं होने के कारण वह बेकार साबित हो रही है। नतीजा यह है कि नालियों में गंदगी जमा हो रही है, मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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बीमारी का खतरा, प्रशासन मौन

गंदगी और ठहरे हुए पानी के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

पहले भी हो चुकी शिकायत, फिर भी ढिलाई

शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले भी इस समस्या को लेकर शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।

आंदोलन की चेतावनी

  • स्थानीय लोगों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द नाली व्यवस्था को सही नहीं किया गया तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
    सवाल खड़े होते हैं…
  • क्या नगर पालिका केवल कागजों में ही विकास कर रही है?
    अधूरे और गलत निर्माण की जिम्मेदारी किसकी है? आखिर कब जागेगा प्रशासन?

    सुमेरपुर का यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि लापरवाही किस तरह आमजन के स्वास्थ्य और जीवन पर भारी पड़ रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस चेतावनी के बाद जागता है या फिर हालात और बिगड़ने का इंतजार करता है ।

न्यूज़ डेस्क

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