पंचायत की लापरवाही से कोठार गांव में विकास कार्य ठप

ग्रामीण योजनाओं से वंचित, मूलभूत सुविधाओं का अभाव
उपखण्ड बाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोठार में सरपंच प्रतिनिधि और ग्राम सेवक की लापरवाही के चलते विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं। हालात यह हैं कि पंचायत क्षेत्र के कई गांवों और वार्डों में वर्षों से कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत कोठार और वेलार क्षेत्र में सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। पंचायत स्तर पर तालमेल की कमी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण विकास कार्य ठंडे बस्ते में चले गए हैं।
वार्ड नंबर 7 की स्थिति सबसे खराब
ग्राम पंचायत कोठार के वार्ड नंबर 7 की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहां सीसी रोड का निर्माण नहीं हुआ है।जगह-जगह सड़कें अधूरी और क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। जवाई जल परियोजना के तहत पानी की पाइपलाइन में लीकेज है वही नालियों की व्यवस्था बदहाल है।
इन समस्याओं के चलते बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव से ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो जाता है।

खेड़ादेवी मंदिर के सामने जलभराव
सोमवार को समाचार की जानकारी लेते हुए पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि रामाराम देवासी ने बताया कि कोठार माजी खेड़ादेवी मंदिर के सामने पानी और कीचड़ जमा रहता है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को रोजाना परेशानी होती है। इसके बावजूद पंचायत प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वार्ड पंच, सरपंच प्रतिनिधि थानाराम प्रजापत, ग्राम सेवक मोहनलाल इन तीनों की ओर से समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते करीब पांच वर्षों से पंचायत में विकास कार्य लगभग बंद पड़े हैं।
बजट नहीं आने का बहाना
ग्रामीणों के अनुसार जब वे ग्राम सेवक से समस्याओं को लेकर बात करते हैं, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया जाता है कि पंचायत में बजट नहीं आ रहा है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है क्योंकि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ग्राम पंचायत में सरपंच प्रतिनिधि और ग्राम सेवक के बीच तालमेल की भारी कमी है, जो विकास कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। इसी लापरवाही के चलते गांव की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि पंचायत में विकास कार्य दोबारा शुरू हो सकें और आम जनता को राहत मिल सके।















