पंजाब में बाढ़ पर कांग्रेस नेता गौरव शर्मा की सख्त टिप्पणी, न्यायिक जांच की माँग

- चंडीगढ़
Gourav Kumar – Chandigarh, Punjab
पंजाब कांग्रेस सोशल मीडिया महासचिव गौरव शर्मा ने हाल ही में आई बाढ़ से निपटने में आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली पंजाब सरकार की नाकामी को कठोर शब्दों में घेरा है। मीडिया को जारी अपने प्रेस बयान में शर्मा ने कहा कि यह बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और मानवीय गलतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार की तैयारी पूरी तरह नाकाम साबित हुई और इसका खामियाजा आम जनता और किसानों को भुगतना पड़ा।
शर्मा ने बाढ़ संकट की न्यायिक जांच की माँग उठाई। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक जज की अध्यक्षता में विशेष जाँच समिति बनाई जाए। इस समिति का काम बाढ़ की वास्तविक वजहों की गहन पड़ताल करना और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करना होगा। गौरव शर्मा ने कहा कि पंजाब आज जिस तबाही से गुजर रहा है, वह केवल मौसम या प्रकृति की वजह से नहीं बल्कि गंभीर कुप्रबंधन का नतीजा है।
कांग्रेस नेता ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) को भी कठघरे में खड़ा किया। उनके अनुसार, भाखड़ा और पोंग डैमों के पानी का सही ढंग से प्रबंधन नहीं किया गया, जिससे बाढ़ की स्थिति और बिगड़ गई। रंजीत सागर डैम से अचानक छोड़े गए पानी ने भी हालात को और गंभीर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बीबीएमबी की विफलता के कारण पंजाब को भारी नुकसान हुआ और बोर्ड को प्रभावित लोगों की भरपाई करनी चाहिए।

राहत कार्यों पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने कहा कि राहत सामग्री या स्वयंसेवकों की कमी नहीं है, लेकिन नेताओं और वीआईपी की लगातार आवाजाही ने बचाव कार्य को प्रभावित किया है। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से किसानों की ज़मीन से मिट्टी हटाने (डी-सिल्टिंग) की नीति जल्द घोषित करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो पंजाब की कृषि को लंबे समय तक क्षति उठानी पड़ेगी।
शर्मा ने किसानों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसानों को अपूरणीय क्षति हुई है और उन्हें अपनी ज़मीन पर आई रेत बेचने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी माँग रखी कि बीबीएमबी में डैम और सिंचाई प्रणालियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी पंजाब के इंजीनियरों को सौंपी जाए। उनका तर्क था कि स्थानीय इंजीनियर प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और सिंचाई जरूरतों को बेहतर समझते हैं।
भविष्य की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शर्मा ने जलवायु परिवर्तन के पैटर्न के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्षा और नदियों के प्रवाह में लगातार बदलाव हो रहे हैं, जिनके अनुसार डैम प्रबंधन की रणनीति को पुनः तैयार करना जरूरी है। उन्होंने पानी रिचार्ज सिस्टम बनाने का सुझाव भी दिया ताकि बाढ़ का असर कम हो और भूजल स्तर बढ़ सके। गौरव शर्मा ने अंत में कहा कि पंजाब के लोग जवाबदेही के हकदार हैं और यह तबाही दोबारा कभी नहीं दोहराई जानी चाहिए।






