पूर्वी टुंडी प्रखंड कांग्रेस ने आयरन लेडी इंदिरा गांधी और लौहपुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि

मैरानवाटांड़ गांव में ग्रामीण महिलाओं की बड़ी भागीदारी, पुष्पांजलि के साथ गूंजे देशभक्ति के नारे
टुण्डी, 31 अक्टूबर (दीपक पाण्डेय)। पूर्वी टुंडी प्रखंड कांग्रेस के तत्वावधान में शुक्रवार शाम मैरानवाटांड़ गांव में आयरन लेडी इंदिरा गांधी और लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती बड़े ही सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम में प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष योगेश प्रसाद रजक और महिला मोर्चा अध्यक्षा सुशांति हांसदा की संयुक्त उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का आयोजन और भावनात्मक माहौल
- गांव के सामुदायिक भवन में रखे गए दोनों महान नेताओं के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई।
- इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष शामिल हुए।
- सभी ने बारी-बारी से दोनों राष्ट्रपुरुषों को नमन किया और उनके योगदान को याद किया।
नेताओं ने रखे अपने विचार
सभा को संबोधित करते हुए प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष योगेश प्रसाद रजक ने कहा—
“भारत की आज़ादी और एकता को कायम रखने में इंदिरा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। दोनों ने अपने जीवन को देश की सेवा में समर्पित किया।”
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल को आज भी भारत के “सिविल सेवकों के संरक्षक संत” के रूप में याद किया जाता है, जबकि इंदिरा गांधी ने देश की मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठाए।
कार्यक्रम का संचालन प्रखंड महासचिव कालीचरण दास ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मोहन दास ने किया।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग
इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे —
सुशांति हांसदा, गीता कुमारी, पहाड़ियां देवी, राष्टमणि भोक्ताईन, मुन्नी भोक्ताईन, हारू दे, मोली भोक्ताईन, पार्वती भोक्ताईन, बुवरूवाहन दे, मुलीराम दां, प्रताप महतो, देवरंजन रजक, प्रदीप मुर्मू, देवप्रकाश रजक, उत्पल दास, सिद्धिक अंसारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और युवा।
आयरन लेडी इंदिरा गांधी — जीवन परिचय (संक्षिप्त जन्मकुंडली)
- पूरा नाम: इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी
- जन्म: 19 नवम्बर 1917, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
- पिता: पंडित जवाहरलाल नेहरू
- शिक्षा: विश्वभारती विश्वविद्यालय (शांतिनिकेतन), ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (इंग्लैंड)
- राजनीतिक जीवन: 1966 में भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री बनीं
महत्वपूर्ण कार्य:
- बांग्लादेश मुक्ति युद्ध (1971) में ऐतिहासिक विजय
- हरित क्रांति और बैंक राष्ट्रीयकरण
- देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर
- निधन: 31 अक्टूबर 1984 (नई दिल्ली)
- उपाधि: आयरन लेडी ऑफ इंडिया
इंदिरा गांधी ने दिखाया कि एक महिला नेतृत्व कितनी दृढ़ और दूरदर्शी हो सकती है। उन्होंने हमेशा भारत को “मजबूत राष्ट्र” के रूप में देखने का सपना देखा।
लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल — जीवन परिचय (संक्षिप्त जन्मकुंडली)
पूरा नाम: सरदार वल्लभभाई झावेरभाई पटेल
जन्म: 31 अक्टूबर 1875, नडियाद (गुजरात)
पिता: झावेरभाई पटेल
शिक्षा: इंग्लैंड से बैरिस्टर की पढ़ाई
लौह पुरुष का राजनीतिक योगदान:
आज़ादी के बाद भारत के 562 रियासतों का एकीकरण
देश की प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी
“भारतीय सिविल सेवा” (IAS/IPS) के संरक्षक माने जाते हैं
निधन: 15 दिसम्बर 1950
उपाधि: लौहपुरुष (Iron Man of India)
सरदार पटेल ने जो एक भारत की कल्पना की, वही आज “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के रूप में दिखाई देती है।
पूर्वी टुंडी प्रखंड कांग्रेस द्वारा आयोजित यह जयंती समारोह सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का संदेश था।
गांव की महिलाओं और युवाओं ने जिस जोश से भाग लिया, उसने यह साबित कर दिया कि भारत आज भी अपने महापुरुषों की विरासत को दिल से सहेजकर रखता है।














