प्रतापपुरा में श्याम जलझूलनी एकादशी महोत्सव सम्पन्न

- प्रतापपुरा।
Shankarlal Gadri – Shahpura
आज श्याम जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर प्रतापपुरा सरोवर किनारे भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान-डुबकी लगाकर धार्मिक उत्सव की शुरुआत की और भगवान श्याम की भव्य पूजा-अर्चना में भाग लिया।
एकादशी का महत्व और परंपरा
जलझूलनी एकादशी, जिसे परिवर्तिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
- इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की विशेष पूजा होती है।
- मान्यता है कि इस व्रत से मोक्ष, मान-सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई क्षेत्रों में इसे डोल ग्यारस के रूप में मनाया जाता है, जहां भक्त शोभायात्रा और डोल लेकर नगर भ्रमण करते हैं।
प्रतापपुरा में पूजा और उत्सव की झलक
- श्रद्धालुओं ने सरोवर में डुबकी लगाने के बाद जयकारों के साथ प्रभु श्याम की आरती उतारी।
- भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया और भक्तों ने श्रृंगार दर्शन का लाभ लिया।
- पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति-भाव से भरे धार्मिक आयोजन चलते रहे।

पूजा-विधि और धार्मिक आयोजन
- भगवान श्याम की प्रतिमा को पुष्प, दूध, दही और घी से अभिषेक कर बाल गोपाल रूप में पूजा गया।
- भक्तों ने व्रत का संकल्प लिया और कथा, भजन एवं श्रृंगार आरती में शामिल हुए।
प्रमुख उपस्थित श्रद्धालु
उत्सव में विष्णु वैष्णव, शंकर लाल गाडरी, राजू कुम्हार, सत्यनारायण वैष्णव, शिवराज प्रजापत, देवकिशन पटेल, सांवर लाल गाडरी, दिलखुश जाट, रमेश लोहार, शैतान गाडरी, गीलू जाट, हनुमान वैष्णव सहित अनेक भक्तगण मौजूद रहे।
प्रतापपुरा में आज का दिन पूरी तरह धार्मिक उत्साह और भक्ति-भाव में डूबा रहा। भक्तों ने भगवान श्याम से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए एकादशी पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया।











