प्रेम, ब्लैकमेल और खौफनाक अंजाम: किन्नर और भाई की हत्या के बाद आरोपी ने खुद को फांसी लगाई
कानपुर से सतना तक: किन्नर काजल, मासूम देव और कातिल प्रेमी आकाश की दर्दनाक दास्तान

प्यार से खून तक: किन्नर और मासूम की हत्या कर कातिल प्रेमी ने किया आत्महत्या
कानपुर की शाम हमेशा की तरह साधारण थी। गलियों में बच्चों की किलकारियाँ गूंज रही थीं, लोग रोज़मर्रा की भागदौड़ में व्यस्त थे। लेकिन हनुमंत विहार के एक किराये के मकान में खामोशी का ऐसा साया पसरा था, जिसने पूरे मोहल्ले को डर और सवालों के सागर में धकेल दिया। चार दिनों तक उठती सड़ी हुई बदबू पड़ोसियों को परेशान कर रही थी, मगर जब दरवाजा आखिरकार टूटा तो जो मंजर सामने आया उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया।
कमरे के अंदर मौत का भयावह दृश्य था। सोफा-कमरा बने दीवान के भीतर किन्नर काजल का शव छिपा पड़ा था और फर्श पर 12 वर्षीय मासूम देव की निर्जीव देह मिली। दोनों की लाशें सड़ चुकी थीं, पहचान मुश्किल हो रही थी। पूरे कमरे में फैली सड़ांध ने साफ कर दिया कि मौत कई दिन पुरानी है।
काजल, जो जन्म से लड़का थी लेकिन खुद को लड़की के रूप में स्वीकार कर चुकी थी, मोहल्ले में अलग पहचान रखती थी। उसने मुंबई जाकर चेहरा बदलने की सर्जरी कराई थी, ताकि समाज के बीच अपनी पहचान को और मजबूती से पेश कर सके। करीब तीन से पांच लाख रुपये उसने इस सर्जरी पर खर्च किए थे। उसकी जिंदगी संघर्षों से भरी थी, लेकिन वह अपने छोटे भाई देव को संतान की तरह पाल रही थी। मोहल्ले के बच्चे उसे “दीदी” कहकर पुकारते थे और देव उसकी आंखों का तारा था।
लेकिन यह तारा अचानक बुझ गया। मौत का यह सिलसिला किसी अनजाने दुश्मन का नहीं बल्कि बेहद करीब के इंसान का खेल था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि काजल और देव की हत्या गला घोंटकर की गई थी। कमरे में सामान बिखरा पड़ा था, जिससे लूट की भी आशंका जताई गई। काजल की मां गुड्डी ने पुलिस को तीन नाम बताए—आकाश, आलोक और हेमराज। तीनों ही परिवार से जुड़े और करीबी माने जाते थे, लेकिन शक की सुई सबसे पहले आकाश पर टिक गई।
आकाश और काजल का रिश्ता केवल दोस्ती का नहीं था। मोहल्ले वाले कहते हैं कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और आकाश अक्सर उसके घर आता-जाता था। लेकिन यह रिश्ता समय के साथ जहर में बदलने लगा। पैसों के लेन-देन, जमीन के सौदों और आपसी तनाव ने दोनों को खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया।
हत्या के बाद आकाश फरार हो गया। कानपुर पुलिस ने जब उसकी तलाश तेज की तो खबर आई कि वह मध्य प्रदेश के सतना जिले में पहुंच चुका है। वहां उसने एक होटल का कमरा नंबर 27 लिया। उसने योजना बनाई कि अगले दिन ट्रेन से किसी और जगह निकल जाएगा। लेकिन किस्मत ने मानो उसका पीछा कर लिया। ट्रेन छूट गई और वह वापस उसी कमरे में लौट आया। अगले दिन होटल स्टाफ ने देखा कि कमरे से कोई हलचल नहीं है। जब दरवाजा तोड़ा गया तो सामने का दृश्य फिर खौफनाक था।
आकाश पर्दों से फांसी लगाकर खुदकुशी कर चुका था। पास ही एक सुसाइड नोट पड़ा मिला। इस नोट ने पूरी कहानी को नया मोड़ दिया। आकाश ने लिखा कि काजल और देव उसे लगातार ब्लैकमेल कर रहे थे। उनके दबाव और मानसिक तनाव से तंग आकर उसने दोनों की हत्या की। उसने यह भी कबूल किया कि काजल के साथ जमीन का सौदा हुआ था और उसने पांच लाख रुपये एडवांस दिए थे, लेकिन सौदा अधूरा रह गया। उसने नोट में यह भी जोड़ा कि वह अपनी मर्जी से मर रहा है और अब किसी से कोई शिकायत नहीं।
सवाल यह है कि क्या सचमुच काजल और देव उसे ब्लैकमेल कर रहे थे, या फिर यह आकाश का खुद को बचाने का आखिरी प्रयास था? पुलिस अब इसी सच्चाई की तलाश कर रही है।
काजल की मां का दर्द इस सबके बीच सबसे गहरा है। उन्होंने पुलिस को बताया कि चार दिनों तक कमरे से आती बदबू की वजह से वह दरवाजे तक नहीं जा पाईं। उन्हें शुरू से शक था कि आकाश ही इस वारदात का जिम्मेदार है। मोहल्ले वाले भी मानते हैं कि आकाश और काजल के बीच का रिश्ता असामान्य तनाव से भरा हुआ था।
आज यह केस केवल हत्या और आत्महत्या की खबर नहीं है। यह उस समाज का आईना है जहां रिश्तों में अविश्वास, पैसों का लालच और सामाजिक स्वीकार्यता की लड़ाई मिलकर इंसानी जिंदगियों को बर्बाद कर देते हैं। काजल, जिसने अपनी पहचान के लिए संघर्ष किया, और देव, जिसने जिंदगी का असली स्वाद भी नहीं चखा, दोनों एक प्रेम-विश्वासघात की भेंट चढ़ गए।
पुलिस अब कानपुर और सतना दोनों जगह की कड़ियों को जोड़ रही है। सुसाइड नोट, मोबाइल डेटा और बैंकिंग लेन-देन की जांच की जा रही है। लेकिन इस पूरी कहानी ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है—क्या आकाश का नोट ही सच्चाई है, या इसके पीछे कोई और गहरी साजिश छिपी है?
हनुमंत विहार की वह गली अब भी खामोश है। लोग कहते हैं कि काजल की हंसी और देव की मासूमियत अक्सर मोहल्ले में गूंजती थी। अब वहां सिर्फ सन्नाटा है, और उन सवालों की गूंज, जिनका जवाब शायद जांच पूरी होने पर ही मिलेगा।










