बनेड़ा में भव्य रूप से मनाया कान्हा जी का जन्मोत्सव, ऑपरेशन सिंदूर की झांकी भी रही आकर्षण का केंद्र

मोनू सुरेश छीपा | लूनिया टाइम्स | भीलवाड़ा/शाहपुरा/बनेड़ा विधानसभा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार बनेड़ा कस्बे और आसपास के गांवों में भक्ति, उत्साह और उल्लास के बीच भव्य रूप से मनाया गया। कान्हा जी के जन्मोत्सव को लेकर कस्बे में लंबे समय से तैयारियां चल रही थीं। अंतिम क्षण तक मंदिरों और बाजारों को आकर्षक ढंग से सजाया गया।
मंदिरों और बाजारों में उमड़ा जनसैलाब
जन्माष्टमी की शाम ढलते ही बनेड़ा के सभी मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
- मंदिरों में आकर्षक झांकियों के दर्शन शुरू हो गए।
- मुख्य बाजार और धार्मिक स्थलों को रंग-बिरंगी लाइटिंग और सजावट से सजाया गया।
- देर रात तक भीड़ इतनी अधिक रही कि भक्तों को लाइन में लगकर दर्शन करने पड़े।
रात्रि 12 बजते ही मंदिरों में महा आरती का आयोजन हुआ और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हुए भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। कई स्थानों पर भजन संध्या और जागरण भी आयोजित हुए, जिनमें भक्तजन भक्ति रस में डूबकर झूमते नजर आए।
नन्हे-मुन्नों में भी दिखा उत्साह
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर नन्हे-मुन्ने बच्चों में भी गजब का उत्साह देखने को मिला। कस्बे के स्कूलों और घरों में बच्चों ने बाल गोपाल और राधा जी के रूप धारण कर पर्व को विशेष बना दिया। उनकी सजधज और मासूम अदाएं श्रद्धालुओं को बेहद भाईं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
इस बार जन्माष्टमी के अवसर पर बनेड़ा कस्बे के लक्ष्मी नारायण मंदिर में सजी ऑपरेशन सिंदूर की झांकी ने सभी का मन मोह लिया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष मंदिर में समसामयिक घटनाओं और उपलब्धियों पर आधारित विशेष झांकियां तैयार की जाती हैं। इस वर्ष भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि ऑपरेशन सिंदूर को झांकी के रूप में प्रदर्शित किया गया।
इस आकर्षक मॉडल ने न केवल भक्तों का ध्यान खींचा, बल्कि भारत की उपलब्धियों पर गर्व की अनुभूति भी कराई। श्रद्धालुओं ने झांकी का अवलोकन करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।
आसपास के गांवों में भी रहा उत्साह
बनेड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। घर-घर भजन-कीर्तन गूंजे और लोग मंदिरों में दर्शन करने पहुंचे।
आस्था और देशभक्ति का अनोखा संगम
बनेड़ा में इस वर्ष का जन्माष्टमी उत्सव केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं रहा, बल्कि इसमें आस्था और देशभक्ति का सुंदर संगम भी देखने को मिला। जहां एक ओर मंदिरों में भक्त कान्हा जी के जन्मोत्सव में लीन रहे, वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन सिंदूर की झांकी ने भारत की उपलब्धियों पर गर्व महसूस कराया।













