बांडी नदी पुलिया: तीन साल से अधर में लटका निर्माण, जनता बेहाल – नरेश ओझा ने उठाई आवाज
बांडी नदी का यह पुलिया सिर्फ लोहे-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी की डोर है। हर बारिश में यह खतरे की घंटी बजाता है, लेकिन प्रशासन अब तक गंभीरता से कदम नहीं उठा सका। ऐसे में जनता को उम्मीद है कि नरेश ओझा की यह पहल विभाग को नींद से जगाएगी और शीघ्र नया पुल बनने का रास्ता साफ होगा।

पाली, 15 सितम्बर। बांडी नदी पर बना जर्जर पुलिया आमजन के लिए अब जानलेवा साबित हो रहा है। तीन साल से नया पुल बनाने की स्वीकृति होने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। इस गंभीर समस्या को लेकर भाजपा नेता नरेश ओझा ने एक बार फिर जोरदार तरीके से आवाज उठाई और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर सुधीर माथुर से मिलकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
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जनता की रोजमर्रा की मुश्किलें
- बरसात के दिनों में पुल पर पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
- मरीजों और प्रसूताओं को अस्पताल पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता है।
- बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है, क्योंकि स्कूली वाहन तक इस रास्ते से गुजरने में खतरा महसूस करते हैं।
- व्यापारियों और किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि माल ढुलाई का रास्ता बाधित हो जाता है।
- कई बार तो ग्रामीणों को मजबूर होकर जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है।
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तीन साल से अधूरा वादा
करीब दो साल पहले इस पुल के लिए 35 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी हो चुकी है। विभाग ने अब तक तीन बार टेंडर निकाले, लेकिन हर बार प्रक्रिया निरस्त हो गई। सवाल यह उठता है कि जब स्वीकृति और बजट दोनों मौजूद हैं तो काम क्यों शुरू नहीं हो रहा?
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नरेश ओझा का रुख
जनता की बढ़ती परेशानी देखते हुए भाजपा नेता नरेश ओझा ने रविवार को चीफ इंजीनियर सुधीर माथुर से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा।
ओझा ने कहा –
“यह पुलिया अब खतरे से खाली नहीं है। करोड़ों की मंजूरी और बार-बार टेंडर होने के बावजूद काम शुरू न होना विभाग की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। यदि शीघ्र काम नहीं शुरू हुआ तो जनता का आक्रोश बढ़ना तय है।”
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मौके पर मौजूद रहे
ज्ञापन सौंपने के दौरान एसई दिलीप परिहार, भाजपा उपाध्यक्ष देवीलाल मेघवाल, दसरथ सिंह मादड़ी, विक्रांत प्रजापत सहित कई कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।











