बिजोलिया में चंबल परियोजना के फिल्टर पंप भवन में भीषण आग, बिजली ट्रांसफार्मर शार्ट सर्किट से लगी आग लाखों का नुकसान

कांस्या चंबल परियोजना के पंप भवन में भीषण आग: लाखों का नुकसान, रातभर बारिश से ट्रांसफार्मर में हुआ शॉर्ट सर्किट
बिजोलिया। कांस्या क्षेत्र स्थित चंबल पेयजल परियोजना के तहत स्थापित फिल्टर पंप भवन में गुरुवार सुबह भीषण आग लग गई, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। यह घटना न सिर्फ परियोजना के संचालन पर असर डालने वाली है, बल्कि लाखों रुपए के नुकसान का कारण भी बनी है।
घटना का कारण: बारिश के कारण ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बुधवार देर रात से हो रही लगातार बारिश के चलते विद्युत ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे आग भड़क उठी। आग ने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को चपेट में ले लिया और अत्यंत संवेदनशील उपकरण जलकर खाक हो गए।
तेज़ कार्रवाई: भीलवाड़ा और मांडलगढ़ से मंगाई दमकलें
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मांडलगढ़ और भीलवाड़ा से दमकल की गाड़ियों को बुलाया गया। दमकल कर्मियों ने करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। समय रहते की गई कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।
10 लाख से अधिक का नुकसान, सप्लाई भी बाधित
चंबल परियोजना कांस्या के एक्सईएन महावीर प्रसाद मीणा ने बताया कि आग के कारण पंप भवन में लगे महंगे फिल्टर, पैनल बॉक्स, वायरिंग और अन्य उपकरण पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। फिलहाल जलापूर्ति कार्य को वैकल्पिक माध्यम से जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इलाके में जल संकट की आशंका
आग से हुए नुकसान के कारण अगले कुछ दिनों तक क्षेत्रीय जलापूर्ति प्रभावित रह सकती है। चूंकि कांस्या परियोजना से आस-पास के कई गांवों और कस्बों को पेयजल की आपूर्ति होती है, इसलिए प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
उपखंड अधिकारी और विद्युत विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता ने जांच समिति का गठन कर 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि भवन में फायर सेफ्टी मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
स्थानीय निवासियों में रोष, मांगी जवाबदेही
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में ऐसी महत्वपूर्ण इकाइयों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतज़ाम होने चाहिए थे। कई ग्रामीणों ने भवन की स्थिति और ट्रांसफार्मर की निगरानी को लेकर पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
क्या बरसात में पर्याप्त एहतियात बरती जा रही है?
इस घटना ने फिर एक बार यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिजली और जल परियोजनाओं जैसे अति-संवेदनशील प्रतिष्ठानों में मॉनसून से पहले पर्याप्त जांच व एहतियात क्यों नहीं बरती जाती। यदि समय रहते उपकरणों की जाँच और फायर सेफ्टी ऑडिट कर लिया जाता, तो संभवतः इस क्षति से बचा जा सकता था।
कांस्या की यह आगजनी की घटना एक चेतावनी है कि जल और ऊर्जा परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की उपेक्षा कभी भी व्यापक जन-जीवन को प्रभावित कर सकती है। समय रहते फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, नियमित निरीक्षण और मॉनसून से पूर्व ट्रांसफार्मरों की विशेष जाँच जैसी प्रक्रियाएं अमल में लाई जाएं, तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है।












