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बोरीवली में ऋषभदेव पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ऋषभायन–02’ : भारतीय सभ्यता की जड़ों पर होगा मंथन


मुंबई।
भारतीय सभ्यता और संस्कृति के आदिपुरुष, प्रथम तीर्थंकर एवं महान राजा ऋषभदेव के जीवन, दर्शन और योगदान पर केंद्रित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘ऋषभायन–02’ का भव्य आयोजन 19 से 21 दिसंबर तक मुंबई के कोरा केंद्र ग्राउंड–4, बोरीवली (पश्चिम) में किया जाएगा। यह ऐतिहासिक सम्मेलन लब्धि विक्रम सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, साधु-संत, धर्माचार्य और प्रतिष्ठित हस्तियां भाग लेंगी।

सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय सभ्यता की उन मूल जड़ों को सामने लाना है, जिनका निर्माण हजारों वर्ष पूर्व राजा ऋषभदेव ने किया था। असंख्य प्राचीन ग्रंथों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक उल्लेखों से यह सिद्ध होता है कि भारतवर्ष की सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक संरचना की नींव ऋषभदेव के आदर्शों पर टिकी है। श्रीभागवत पुराण सहित अनेक ग्रंथों में भारत के नाम और उसकी परंपराओं का उल्लेख मिलता है, जो इस ऐतिहासिक सत्य को और सुदृढ़ करता है।

प्रथम दिन: शोभायात्रा और धर्म परिषद का भव्य शुभारंभ

सम्मेलन के प्रथम दिन प्रातः भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो नगर में धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना का संचार करेगी। इसके पश्चात मेवाड़ के महाराजा श्री लक्ष्यराज सिंह द्वारा कला मंडप एवं केसरिया दरबार का उद्घाटन किया जाएगा।
इस अवसर पर जैन गच्छाधिपति यशोवर्म सूरी महाराज का आशीर्वचन और प्रवचन कार्यक्रम आयोजित होगा।
दिन के मुख्य आकर्षण के रूप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा धर्म परिषद का उद्घाटन किया जाएगा।

धर्म परिषद में विशेष रूप से रत्नसुंदर सूरीश्वर महाराज, स्वामी राजेंद्र आनंदगिरि, धर्मानंद स्वामी महाराज, दंडी स्वामी जितेंद्र सरस्वती महाराज, महंत दयाल पुरी महाराज, बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र शास्त्री, शांतिगिरी महाराज, गुरु माउली डिंडोली सहित अनेक साधु-संत और धर्माचार्य राजा ऋषभदेव के दर्शन, अहिंसा, कर्म और समाज निर्माण पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

दूसरा दिन: शैक्षणिक और बौद्धिक विमर्श

सम्मेलन के दूसरे दिन देश के अनेक विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह पहल राजा ऋषभदेव के दर्शन को अकादमिक शोध, पाठ्यक्रम और सामाजिक अध्ययन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विद्वानों द्वारा शोधपत्र, परिचर्चाएं और संवाद सत्र आयोजित होंगे, जिनमें भारतीय सभ्यता के विकासक्रम पर गहन विमर्श होगा।

तीसरा दिन: सांस्कृतिक समापन और संकल्प

तीसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, समापन सत्र और भावी संकल्पों के साथ सम्मेलन का समापन होगा। आयोजन का उद्देश्य केवल इतिहास का स्मरण नहीं, बल्कि आधुनिक समाज में ऋषभदेव के मूल्यों—अहिंसा, सत्य, श्रम, आत्मसंयम और सामाजिक समरसता—को आत्मसात करना है।

‘ऋषभायन–02’ न केवल एक सम्मेलन है, बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा को समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान है। मुंबई में होने जा रहा यह आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं और संस्कृति प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।


न्यूज़ डेस्क

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