भारत के उपभोक्ताओं के लिए और एक राहत भरी खबर रूस के बाद अर्जेंटीना ने निर्यात शुल्क में की कटौती

मार्केट पर बढ़ा दबाव; निकट अवधि में कीमतों पर पढ़ सकता है असर : शंकर ठक्कर
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने बताया रूस के बाद अब भारत जहां से अधिक मात्रा में सोयाबीन एवं सूरजमुखी तेल की आयात करता है अर्जेंटीना ने सोयाबीन ऑयल, सोयामील, सोयाबीन और सूरजमुखी उत्पादन पर निर्यात शुल्क को स्थायी रूप से घटा दिया है। यह फैसला वैश्विक कृषि व्यापार में अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में लिया गया है और इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर निकट अवधि में दबाव बनने की संभावना है।
राष्ट्रपति जेवियर माइली ने 26 जुलाई को ब्यूनस आयर्स में आयोजित पालेरमो कैटल शो के दौरान इस नीति की घोषणा की। नई संरचना के अनुसार, सोयामील और सोया ऑयल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 31% से घटाकर 24.5%, सोयाबीन पर 33% से घटाकर 26%, और प्रोडक्ट्स पर 7% से घटाकर 5.5% कर दी गई है।
“ये कटौती स्थायी हैं और मेरे कार्यकाल में इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। एक्सपोर्ट ड्यूटी एक अभिशाप है, जिसे कभी लागू नहीं होना चाहिए था।”
– माइली
इससे पहले सरकार ने 27 जनवरी 2025 को यही टैरिफ कटौती अस्थायी रूप से लागू की थी, जो 30 जून तक प्रभावी रही। हालांकि, 1 जुलाई को फिर से पुरानी दरें बहाल कर दी गई थीं। कृषक समुदाय के दबाव के बाद अब सरकार ने इन कटौतियों को स्थायी रूप से लागू कर दिया है।
शंकर ठक्कर ने आगे कहा इन कटौतियों से अर्जेंटीना की वैश्विक सोया ऑयल व्यापार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। निर्यात शुल्क घटने से अर्जेंटीना के सप्लायर्स अब अन्य देशों जैसे ब्राज़ील और अमेरिका की तुलना में और सस्ते दाम पर ऑफर दे सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले से ही सीजनल उत्पादन वृद्धि (सोया और पाम तेल में) और कमजोर क्रूड ऑयल कीमतों के कारण दबाव में है। ऐसे में रूस के बाद अर्जेंटीना की नई कीमत प्रतिस्पर्धा निकट अवधि में कीमतों पर और दबाव डाल सकती है। जिसका फायदा त्योहारी सीजन में भारत के उपभोक्ताओं को मिल सकता है।












