मीरा-भायंदर महानगरपालिका : 18 फरवरी की महासभा पर टिकी निगाहें, समितियों के गठन के साथ सभापति की दौड़ तेज

मीरा-भायंदर महानगरपालिका में 18 फरवरी को होने वाली महासभा की बैठक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बैठक में महानगरपालिका की प्रमुख समितियों के गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद सभापति पद की दौड़ औपचारिक रूप से शुरू मानी जाएगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने संख्याबल के आधार पर रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
भाजपा के गट नेता हसमुख गेहलोत तथा मीरा-भायंदर विकास आघाड़ी (कांग्रेस + शिवसेना शिंदे) के गट नेता जय ठाकुर समितियों के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करेंगे। प्रस्तावित नामों के आधार पर स्थायी समिति, महिला व बाल कल्याण समिति और परिवहन समिति का गठन किया जाएगा। बाद में इन्हीं समितियों के सदस्यों में से सभापति का चुनाव होगा, जिससे राजनीतिक सरगर्मियां और बढ़ गई हैं।
समितियों का संख्याबल इस प्रकार रहेगा:
1. स्थायी समिति
कुल 16 सदस्य
- भाजपा: 13
- कांग्रेस-शिवसेना आघाड़ी: 3
2. महिला व बाल कल्याण समिति
कुल 9 सदस्य
- भाजपा: 7
- कांग्रेस-शिवसेना: 2
3. परिवहन समिति
कुल 12 सदस्य
- भाजपा: 10
- कांग्रेस-शिवसेना: 2
नियमों के अनुसार स्थायी समिति में केवल सदन सदस्य यानी नगरसेवक या नगरसेविका ही शामिल हो सकते हैं। महिला व बाल कल्याण समिति में भी सदन सदस्य का चयन अनिवार्य है, साथ ही 75 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होना जरूरी है। वहीं परिवहन समिति में सदन सदस्य के अलावा परिवहन क्षेत्र से किसी बाहरी अनुभवी व्यक्ति को भी शामिल करने का प्रावधान है।
अब सबकी निगाहें उन नामों पर टिकी हैं जिन्हें 18 फरवरी की बैठक में प्रस्तावित किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समितियों की संरचना ही आगे सभापति पद की दिशा तय करेगी। ऐसे में यह महासभा केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है।
















