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मेजा बांध पर संकट: मातृकुंडिया बांध से भराव संभव, फिर भी नहीं खोली गई मेजा फीडर नहर | जिम्मेदारों की चुप्पी बनी चिंता का विषय

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मातृकुंडिया बांध भराव क्षमता के करीब, बनास गेट खुलने की संभावना तेज

भीलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों के लिए जल आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत मातृकुंडिया बांध इस समय अपनी भराव क्षमता 22.50 फीट में से 21.50 फीट तक भर चुका है। ऐसे में कभी भी बनास नदी के गेट खोले जा सकते हैं। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि अब तक भीलवाड़ा जिले के मेजा बांध को भरने वाली मेजा फीडर नहर पर किसी भी तरह का ध्यान नहीं दिया गया है।

यह स्थिति न सिर्फ जल प्रबंधन की विफलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि यदि अब भी फीडर को सक्रिय नहीं किया गया, तो मेजा बांध को भरने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

🔷 मेजा फीडर की सफाई अधूरी, झाड़ियां और कचरे से भरी नहर बनी बाधा

मातृकुंडिया से निकलने वाली मेजा फीडर नहर में कई स्थानों पर झाड़ियां, मिट्टी और प्लास्टिक कचरा जमा है। इस नहर की सफाई अब तक नहीं की गई है, और अधिकारियों का इस ओर कोई विशेष ध्यान नहीं है।

यदि समय रहते सफाई नहीं की गई, तो यह पेयजल संकट को जन्म दे सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की सिंचाई और भीलवाड़ा शहर की जल आपूर्ति भी इससे प्रभावित हो सकती है।

🔷 जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: मेजा फीडर के प्रति नहीं दिखाई उत्सुकता

भीलवाड़ा की जीवन रेखा कहे जाने वाले मेजा बांध के लिए मातृकुंडिया से जुड़ी फीडर नहर आवश्यक है। परंतु अब जब चंबल परियोजना से पानी आ रहा है और पेयजल की समस्या आंशिक रूप से सुलझ गई है, तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान मेजा फीडर से हट चुका है।

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यह रवैया न केवल विकास योजनाओं की अनदेखी है, बल्कि भविष्य में जल संकट की संभावना को आमंत्रण भी देता है।

🔷 धमाना और कपासन फीडर खोली गई, फिर भी मेजा फीडर नजरअंदाज

जहां एक ओर कपासन के जनप्रतिनिधियों की पहल से धमाना और कपासन फीडर नहरें खोल दी गई हैं, वहीं मातृकुंडिया बांध से जुड़ी मेजा फीडर अब भी बंद है।

इससे साफ है कि जहां प्रयास होते हैं, वहां जल प्रबंधन की योजनाएं सफल हो रही हैं, और जहां उदासीनता है, वहां जनता को संकट झेलना पड़ रहा है।


  • मातृकुंडिया बांध 21.50 फीट भर चुका है, जबकि इसकी कुल क्षमता 22.50 फीट है।

  • बनास के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं, लेकिन मेजा फीडर पर कोई कार्रवाई नहीं।

  • मेजा फीडर नहर में कचरा और झाड़ियां, सफाई कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ।

  • भीलवाड़ा की पानी की मुख्य जरूरत मेजा बांध, लेकिन जनप्रतिनिधि मौन।

  • कपासन-धमाना फीडर खोली गई, मेजा फीडर को प्राथमिकता नहीं।

  • जल प्रबंधन में राजनीतिक इच्छा शक्ति और प्रशासनिक सक्रियता की कमी।


🔷 क्या होनी चाहिए कार्रवाई? – विशेषज्ञों की राय

  • मेजा फीडर की तत्काल सफाई और निरीक्षण जरूरी।
  • जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण दल बनाना चाहिए।
  • जल आपूर्ति की दीर्घकालीन योजना बनाकर हर फीडर को समान महत्व देना होगा।
  • जल संकट से बचने के लिए समयबद्ध निर्णय जरूरी है।

वर्तमान स्थिति अगर ऐसी ही रही तो भीलवाड़ा को मेजा बांध भरने के लिए मानसून पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे जल संकट की स्थिति गहरा सकती है। समय रहते यदि मेजा फीडर को खोला गया और नहर की सफाई की गई, तो मातृकुंडिया बांध से बहता पानी मेजा बांध तक पहुंच सकता है और हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।

भीलवाड़ा के जागरूक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया को इस मुद्दे पर त्वरित संज्ञान लेना चाहिए, ताकि वर्षा जल का समुचित उपयोग किया जा सके और जल संकट से बचा जा सके।

 

न्यूज़ डेस्क

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