मोहनखेड़ा में धर्म-भक्ति का महासंगम, आचार्य नित्यसेन सूरीश्वरजी ने इंदौर चातुर्मास की घोषणा की

मोहनखेड़ा (म.प्र.) | दीपक जैन चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर मोहनखेड़ा तीर्थ स्थित जयन्तसेन म्यूजियम में आयोजित भव्य चातुर्मास उद्घोषणा महोत्सव धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने अपने श्रीमुख से वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु इंदौर श्रीसंघ को स्वीकृति प्रदान की।
भक्ति और साधना का अद्वितीय वातावरण
ओलीजी की तपाराधना के अंतिम चरण में आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इंदौर, उज्जैन, अहमदाबाद, मुंबई, सूरत सहित अनेक स्थानों से आए श्रीसंघों ने भावपूर्ण विनतियाँ प्रस्तुत कीं।
साधु-साध्वी भगवंतों की तेजस्वी उपस्थिति और गुरु परंपरा की गरिमा ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आभा से भर दिया। चारों ओर भक्ति की गूंज और गुरु कृपा का अनुभव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
महत्वपूर्ण घोषणाएँ और सम्मान
महोत्सव के दौरान बड़ावदा में वालीबाई सागरमलजी छाजेड़ परिवार द्वारा निर्मित जिनालय की प्रतिष्ठा के लिए 8 मई का शुभ मुहूर्त घोषित किया गया।
साथ ही, प्रदेश के केबिनेट मंत्री चेतन्य कश्यप को “जैन संघ विभूषण” सम्मान से अलंकृत किया गया, जिससे समाज में गौरव की भावना देखने को मिली।
उल्लास से गूंज उठा परिसर
जैसे ही चातुर्मास की घोषणा हुई, पूरा मोहनखेड़ा परिसर ढोल-नगाड़ों, रंग-गुलाल और जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर नृत्य करते नजर आए और माहौल पूर्णतः उत्सवमय बन गया।
विशेष धार्मिक आयोजन और सहभागिता
गुरु पद पूजा एवं काम्बली का पुण्य लाभ विजयवाड़ा श्रीसंघ के विजय गोवाणी द्वारा प्राप्त किया गया। संगीतमय भक्ति प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ दी, वहीं संचालन मोहित तातेड ने प्रभावी ढंग से किया।
ओलीजी आराधना के लाभार्थी हंजाबाई वरदीचंदजी तातेड परिवार का विशेष सम्मान किया गया, जो उनकी धर्मनिष्ठा और सेवा भाव का प्रतीक रहा।
चातुर्मास का संदेश
यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संयम और साधना का आह्वान है। मोहनखेड़ा की यह ऐतिहासिक घड़ी जैन समाज के लिए लंबे समय तक प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।















