युवा मुनिवर श्री नम्ररत्नविजयजी म.सा. का कालधर्म, जैन समाज में शोक

वसई। जैन समाज के लिए अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। प्रख्यात जैन आचार्य आचार्य भगवंत श्री राजरत्नसूरिश्वरजी म.सा. के शिष्य युवा मुनिवर श्री नम्ररत्नविजयजी म.सा. का गुरुवार, 12 मार्च 2026 (फाल्गुन वदी 9) को सड़क दुर्घटना में कालधर्म हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पूज्य मुनिश्री प्रातःकाल विहार करते हुए महावीरधाम की ओर जा रहे थे। सुबह लगभग 5:30 बजे दो गाड़ियों की टक्कर होने से यह दुखद दुर्घटना घटित हुई, जिसमें पूज्य मुनिश्री का देहावसान हो गया। इस घटना से जैन समाज में गहरा शोक व्याप्त है।
बताया गया कि मुनिश्री ने एक दिन पूर्व ही वर्षीतप आरंभ किया था और उपवास किया था। वर्षीतप के दौरान ही उनका कालधर्म होना समाज के लिए अत्यंत भावुक क्षण माना जा रहा है।
पूज्य मुनिश्री श्रुत-अभ्यास, साधना और विनयशीलता के लिए जाने जाते थे। उनके सरल स्वभाव और अनुशासित जीवन के कारण वे समाज में अत्यंत सम्मानित थे। उनके कालधर्म से साधु-संघ और श्रद्धालुओं में शोक की लहर है।
अंतिम यात्रा का कार्यक्रम
- उछामणी (बोली): आज दोपहर 2:30 बजे
श्री वसई रोड जैन संघ, अंबाडी रोड उपाश्रय में - अंतिम यात्रा: शाम 4:00 बजे से प्रारंभ होगी।
समाज के श्रद्धालुओं ने पूज्य मुनिश्री की आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
















