राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक माणकचंद ‘भाईजी’ को पाली में श्रद्धांजलि, कार्यकर्ताओं ने किया जीवन को नमन
‘भाईजी’ का जीवनसंघर्ष और समर्पण प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए प्रेरणास्त्रोत: विजय कृष्ण नाहर

पाली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक और पाथेय कण पत्रिका के संरक्षक माणकचंद ‘भाईजी’ को श्रद्धांजलि देने के लिए पाली स्थित सोमनाथ मंदिर मार्ग संघ कार्यालय परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने एकत्र होकर ‘भाईजी’ के प्रति श्रद्धा अर्पित की।
संघ के जीवन समर्पित कार्यकर्ता थे भाईजी: जिला संघचालक नेमीचंद अखावत
जिला संघचालक नेमीचंद अखावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “माणकचंद जी ‘भाईजी’ ने प्रचारक जीवन की कठिन तपस्या करते हुए संगठनात्मक, वैचारिक और बौद्धिक क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा।”
‘भाईजी’ की स्मरण शक्ति और समर्पण अद्वितीय था: विजय कृष्ण नाहर
पूर्व प्रचारक विजय कृष्ण नाहर ने बताया कि उन्होंने प्रचारक जीवन में माणक जी के साथ लंबे समय तक कार्य किया। उन्होंने कहा,
“उनकी स्मरण शक्ति गज़ब की थी। रामचरितमानस की चौपाइयां उन्हें कंठस्थ थीं। शिक्षा वर्गों में 500-600 स्वयंसेवकों के नाम और परिचय याद रखना उनके लिए सामान्य बात थी।”
उन्होंने आगे कहा कि “1989 में जब मुझे पाथेय कण की जिम्मेदारी मिली, उस दौरान माणक जी का योगदान 90 प्रतिशत तक रहा। उनका कार्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और मधुर व्यवहार हर कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
पाथेय कण के पीछे माणक जी की निस्वार्थ साधना थी: गौतम चंद यति
गौतम चंद यति ने भावुक होते हुए कहा,
“माणक जी का स्वभाव अत्यंत आत्मीय और स्नेहिल था। वे बाहर से आए कार्यकर्ताओं को भी उतना ही स्नेह देते थे जितना अपने परिजनों को। उनका जीवन पूरी तरह निष्कलंक और जल जैसा निर्मल था।”
उन्होंने यह भी बताया कि “पाथेय कण के लिए उन्होंने जीवनभर अर्थ की व्यवस्था की लेकिन कभी अपने लिए कुछ नहीं माँगा। उनका हर सहयोगी उनके प्रति श्रद्धा भाव रखता था क्योंकि वे सम्मान देना जानते थे।”
सहजता और आत्मीयता की जीवंत मिसाल थे भाईजी: प्रवीण कुमार त्रिवेदी
प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने याद किया,
“जब वे स्वयंसेवकों के घर जाते थे तो पूरे परिवार से ऐसा घुल-मिल जाते थे मानो वर्षों से जान-पहचान हो। रसोई में जाकर घर में जो भी भोजन बना होता, उसे बिना संकोच स्वीकार कर लेते थे। यही उनकी सरलता थी जिसने उन्हें सबका प्रिय बना दिया।”
माणकचंद ‘भाईजी’ का जीवन परिचय:
- नाम: माणकचंद जी ‘भाईजी’
- जन्म: 2 नवम्बर 1942, कसारी-बड़ा, जिला नागौर (राजस्थान)
- निधन: 30 जुलाई 2025, SMS अस्पताल, जयपुर
- आयु: 83 वर्ष
- बीमारी: किडनी की समस्या से पीड़ित
- प्रवेश प्रचारक जीवन में: वर्ष 1966
- सेवा काल: लगभग 60 वर्ष
- प्रमुख भूमिका: पाथेय कण के संरक्षक, कई प्रांतों में संघ कार्य विस्तार
“भाईजी जैसे प्रचारक विरले होते हैं। उनका जीवन हमें राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।”
— विजय कृष्ण नाहर

“वे चलते-फिरते आदर्श थे – सरल, स्नेही, अनुशासित और समर्पित।”
— गौतम चंद यति












