लोनी हत्याकांड: लालच की पराकाष्ठा, एयरफोर्स के रिटायर्ड अफसर की हत्या में सगे बेटे ही निकले ‘सुपारी किलर’ के मास्टरमाइंड

Luniya Times News: विशेष इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) |
लोनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भारतीय वायु सेना (IAF) के रिटायर्ड अफसर योगेश कुमार (58) की हत्या की सनसनीखेज गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। यह मामला केवल एक साधारण अपराध नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों के कत्ल की एक खौफनाक दास्तां बनकर सामने आया है। गाजियाबाद पुलिस की गहरी छानबीन में यह साफ हो गया है कि इस हत्याकांड की साजिश मृतक के अपने ही दो बेटों ने रची थी।
जांच टीम और आधिकारिक खुलासा
इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व जिले के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया गया। गाजियाबाद पुलिस के DCP (ग्रामीण जोन) सुरेंद्र नाथ तिवारी ने प्रेस वार्ता में मामले का विवरण साझा किया। उनके साथ ACP लोनी, सूर्यबली मौर्य ने भी जांच के तकनीकी बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
DCP सुरेंद्र नाथ तिवारी का आधिकारिक बयान:
“हमने घटना के 48 घंटों के भीतर संदिग्धों की पहचान कर ली थी। मृतक के बेटों, अंकित और जतिन की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। वैज्ञानिक साक्ष्यों और कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि घर के सदस्यों ने ही बाहरी बदमाशों के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया है।”
हत्या की मुख्य वजह: संपत्ति और फंड का अंधा मोह
पुलिस पूछताछ और जांच में हत्या के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं:
रिटायरमेंट फंड पर नजर: योगेश कुमार को वायु सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद जो मोटी रकम मिली थी, उनके दोनों बेटे अंकित और जतिन उसे हड़पना चाहते थे।
करोड़ों की संपत्ति: मृतक की करोड़ों की पैतृक संपत्ति थी। बेटों को डर था कि उनके पिता संपत्ति को अपनी मर्जी से कहीं और न दे दें।
कर्ज का दबाव: प्राथमिक जांच के अनुसार, एक बेटा भारी कर्ज में डूबा हुआ था और उसे तत्काल बड़ी रकम की आवश्यकता थी।

साजिश और ‘सुपारी’ का खेल
इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए बेटों ने किसी पेशेवर अपराधी की तरह प्लानिंग की थी:
5 लाख की सुपारी: दोनों बेटों ने अपने पिता को रास्ते से हटाने के लिए ₹5 लाख की सुपारी तय की थी।
अपराधी साठगांठ: साजिश में संजय (उत्तर प्रदेश पुलिस का निलंबित सिपाही) ने बिचौलिए की भूमिका निभाई और हत्यारों व बेटों के बीच कड़ी का काम किया।
‘एलिबी’ का ड्रामा: जिस समय हत्या की गई, बेटों ने खुद को निर्दोष दिखाने के लिए घटनास्थल से दूर होने का बहाना तैयार किया था, लेकिन मोबाइल लोकेशन ने उनकी पोल खोल दी।
अपराध का तरीका (Modus Operandi)
ACP सूर्यबली मौर्य की देखरेख में हुई जांच में पता चला कि घटना वाली रात योजना के मुताबिक बेटों ने घर का पिछला दरवाजा खुला छोड़ दिया था। शूटरों ने आसानी से प्रवेश किया और सोते हुए अफसर पर हमला कर दिया। बेटों ने अपने पिता की चीखें अनसुनी कर दीं और बगल के कमरे में छिपे रहे ताकि इसे बाहरी लुटेरों का हमला साबित किया जा सके।
Luniya Times News को मिली जानकारी के अनुसार, जब पुलिस ने घेराबंदी की तो निम्नलिखित दृश्य सामने आए:

आरोपियों का कबूलनामा: कड़ाई से पूछताछ करने पर बड़े बेटे अंकित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि पिता उनके खर्चों पर लगाम लगाते थे, जो उन्हें नागवार गुजरा।
हथियार की रिकवरी: पुलिस आरोपियों को उस पुराने खंडहर में ले गई जहाँ उन्होंने हत्या में इस्तेमाल नुकीला हथियार (चाकू) और खून से सने कपड़े छिपाए थे।
नकदी की बरामदगी: पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹1.5 लाख की नकदी बरामद की है, जो सुपारी की पहली किस्त थी।
कानूनी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
पुलिस ने अंकित, जतिन, निलंबित सिपाही संजय और अन्य शूटरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (हत्या) और 61 (आर्थिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। थाना प्रभारी (SHO) लोनी को निर्देश दिए गए हैं कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट के लिए मजबूत चार्जशीट तैयार की जाए।
Luniya Times News की राय
यह घटना याद दिलाती है कि नैतिक मूल्यों का पतन समाज के लिए कितना घातक है। जिस पिता ने जीवन भर देश की सरहदों की सुरक्षा की, वह अपने ही घर के भीतर अपनों के ही लालच का शिकार हो गया।












