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श्रावण मास में ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर बना आस्था का महाकेंद्र — हजारों श्रद्धालुओं ने चने की दाल चढ़ाकर मांगी ऋण मुक्ति की कामना

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मूलचंद पेसवानी
जिला संवाददाता

मूलचंद पेसवानी वरिष्ठ पत्रकार, जिला संवाददाता - शाहपुरा / भीलवाड़ा 

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शाहपुरा (पेसवानी) —  श्रावण मास के पावन अवसर पर भगवान शिव की भक्ति के रंग में रंगे देशभर के श्रद्धालु इन दिनों राजस्थान के देवपुरी ग्राम स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की ओर उमड़ रहे हैं। श्रावण के पहले और चौथे सोमवार को यहां जो दृश्य देखने को मिला, वह किसी कुंभ मेले से कम नहीं था। हजारों श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही मंदिर पहुंचने लगे और देर रात तक जल, दूध और विशेष रूप से चने की दाल अर्पण कर भगवान शिव से ऋण मुक्ति की कामना करते रहे।

अनूठा मंदिर, अनोखी परंपरा

यह मंदिर देश के उन विरले शिव मंदिरों में से एक है, जहां चांदी, सोना या महंगे चढ़ावे की बजाय केवल चने की दाल चढ़ाई जाती है। यही नहीं, यहां कोई विशेष पुजारियों द्वारा पुजन कराने की बाध्यता नहीं है — जो जैसा है, वैसी ही श्रद्धा से भगवान शिव के चरणों में सिर झुकाता है।

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से चने की दाल चढ़ाता है, उसके जीवन से आर्थिक तंगी और कर्ज का संकट स्वत: समाप्त हो जाता है। यह परंपरा न केवल प्राचीन है बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए सहज, सरल और समर्पण भाव से भरी हुई है।

2004 की बाढ़: जब प्रकृति के आगे भी अडिग रहा शिवलिंग

वर्ष 2004 की बाढ़ की वह घटना आज भी ग्रामीणों की आस्था को नई ऊर्जा देती है। संजय मंत्री बताते हैं कि उस वर्ष भीषण बारिश के कारण मंदिर परिसर और आसपास के इलाके जलमग्न हो गए थे। मंदिर की मूर्ति पूरी तरह पानी में डूब गई थी, लेकिन जब पानी उतरा तो देखा गया कि शिवलिंग उसी स्थान पर अडिग खड़ा था, बिना किसी क्षति के। इस चमत्कार ने ऋण मुक्तेश्वर महादेव को केवल देवपुरी ही नहीं, बल्कि समूचे राजस्थान का विश्वास का प्रतीक बना दिया।

श्रावण मास में विशेष अनुष्ठान और आयोजन

श्रावण मास के अवसर पर मंदिर में दैनिक रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और विशेष पूजन आयोजित किए जा रहे हैं। संजय मंत्री और मंदिर समिति द्वारा भक्तों की सुविधा के लिए टेंट, पेयजल, बैठने के लिए बेंच और साफ-सफाई की बेहतरीन व्यवस्था की गई है। मंदिर प्रांगण में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी व भंडारे का लाभ भी मिल रहा है।

भक्तों की श्रद्धा ने बदली मंदिर की तस्वीर

समाजसेवियों और स्थानीय ग्रामीणों की मेहनत और भक्ति ने इस मंदिर को एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल में तब्दील कर दिया है। राजस्थान के भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, कोटा, जोधपुर सहित कई जिलों से श्रद्धालु यहां आ रहे हैं। कुछ श्रद्धालु पैदल तो कुछ दुपहिया और कारों में सवार होकर यहां पहुंच रहे हैं।

भविष्य में धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित

मंदिर समिति और प्रशासन द्वारा मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसमें ठहरने की सुविधा, शौचालय, पार्किंग, और नियमित भजन-कीर्तन के लिए स्थायी मंच की व्यवस्था शामिल है।

मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों का मानना है कि यदि राज्य सरकार और पर्यटन विभाग इस स्थल को धार्मिक मान्यता देकर प्रचारित करे, तो यह उज्जैन के महाकाल, वाराणसी के काशी विश्वनाथ जैसे स्थलों की भांति प्रसिद्ध हो सकता है।

कर्ज़ से मुक्ति की आस लेकर आता है हर भक्त

भक्तों के अनुभव इस मंदिर की मान्यता को और भी मजबूत करते हैं। एक वृद्ध श्रद्धालु ने बताया, “मैंने 10 साल पहले व्यापार में भारी नुकसान उठाया था। घर बिकने की नौबत आ गई थी। लेकिन यहाँ आकर चने की दाल चढ़ाई, और शिवजी से ऋण मुक्ति की प्रार्थना की। कुछ ही महीनों में स्थितियां बदलने लगीं। तब से हर साल श्रावण मास में यहां दर्शन करने आता हूँ।”


ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताएं एक नजर में:

  • स्थान: देवपुरी ग्राम, शाहपुरा क्षेत्र, राजस्थान
  • परंपरा: चने की दाल चढ़ाकर ऋण मुक्ति की कामना
  • खास दिन: श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार, विशेषकर प्रथम और चतुर्थ सोमवार
  • ऐतिहासिक घटना: वर्ष 2004 की बाढ़ में भी शिवलिंग सुरक्षित रहा
  • विशेष अनुष्ठान: जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, भंडारा
  • आने वाले भक्त: भीलवाड़ा, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा सहित अन्य जिलों से
  • भविष्य की योजना: धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विस्तार

श्रद्धा, सेवा और शिव के चरणों का मिलन स्थल

ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर आज एक ऐसा स्थल बन गया है, जहां श्रद्धा, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम होता है। यह न केवल कर्ज मुक्ति की कामना का मंदिर है, बल्कि जीवन की चुनौतियों से जूझ रहे हर व्यक्ति के लिए एक नया विश्वास, नई ऊर्जा और नया संबल देता है।

न्यूज़ डेस्क

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