श्री वरकाना पार्श्वनाथ तीर्थ में गुरु पूणिमा महोत्सव हर्षोल्लासीत संपन्न

वरकाणा तीर्थ में बदामिया परिवार के आजीवन लाभार्थ से संपन्न हुआ गुरु पूर्णिमा महोत्सव
वरकाणा (पाली) – वरकाणा स्थित प्रसिद्ध जैन तीर्थ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव इस बार भी भव्यता एवं उल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर सादड़ी निवासी एवं CELLO Group से जुड़े बदामिया परिवार – मातृश्री पंपूबेन घीसुलाल बदामिया परिवार – आजीवन लाभार्थी के रूप में विशेष रूप से प्रतिष्ठित रहा।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हर्षोल्लासपूर्ण आयोजन
इस मासिक पूर्णिमा उत्सव को गुरु पूर्णिमा महोत्सव के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु वरकाणा तीर्थ में एकत्र होते हैं। सभा मंडप में तीर्थ के विभिन्न पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही:
- अध्यक्ष – रमेश कोठारी, उपाध्यक्ष – प्रकाश चौपड़ा, कोषाध्यक्ष – बस्तीमल बोराणा, सचिव – अशोक तापड़िया, उपसचिव – निर्मल ढेलरिया, अन्य प्रमुख पदाधिकारी – वोरा छगन छाजेड़, कपूर बलदौता, मुकेश मेहता, दीपचंद पूनमिया
अध्यक्ष का उद्बोधन: गांवों से जुड़ें और सेवा को बढ़ाएं
अध्यक्ष रमेश कोठारी ने सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए विशेष रूप से पाली जिले से नियमित रूप से पधारने वाले भक्तों की अनुमोदना की। उन्होंने प्रवासियों से अपील की कि वे अपने गांव के मतदाता सूची में नाम जुड़वाकर सामाजिक सहभागिता निभाएं।
साथ ही उन्होंने वरकाणा तीर्थ में संचालित ₹51,000 साधारण खाते के फंड में अधिकाधिक श्रद्धालुओं से नाम दर्ज कराने का आग्रह किया, ताकि धार्मिक सेवा कार्यों को और अधिक मजबूती मिल सके।
51000 का नाम दर्ज करा दिया उदारता का संदेश
इस क्रम में ढालोप (रानी) निवासी श्री घेवरचंद निहालचंद राठौड़ ने ₹51,000 का नाम दर्ज कराकर अपनी लक्ष्मी का पुण्य उपयोग कर सभी के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की।
संघ पूजन और स्वामी वात्सल्य का मिला पुण्य लाभ
महोत्सव के दौरान संघ पूजन का लाभ ट्रस्टी मुकेश मेहता ने लिया। सभी पधारे हुए श्रद्धालुओं ने स्वामी वात्सल्य (भोजन प्रसादी) में सहभागी बनकर इस गुरु पूर्णिमा पर्व को आध्यात्मिक दिव्यता से भर दिया।
संपादकीय टिप्पणी:
ऐसे पावन आयोजन हमें समूह की शक्ति, धर्म के प्रति समर्पण, और सामूहिक सहयोग का सजीव उदाहरण देते हैं। वरकाणा तीर्थ जैसे स्थल न केवल धार्मिक जागृति के केंद्र हैं, बल्कि सामाजिक एकजुटता के भी सशक्त माध्यम हैं। बदामिया परिवार की आजीवन सेवा, घेवरचंद जी की उदारता और रमेश कोठारी जी की नेतृत्व प्रेरणा निश्चित ही समाज में सद्भाव और समर्पण की भावना को और प्रबल करेगी।

















