श्री सेसली पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिष्ठा महा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

- सेसली, बाली
सेसली में आयोजित सेसली पार्श्वनाथ भगवान की मंगल प्रतिष्ठा महा महोत्सव भव्यता और धार्मिक श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रतिष्ठाचार्य गुरुभगवंत चिंदानद सूरीश्वर महाराज की पावन निश्रा में यह आयोजन सम्पन्न हुआ।
प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य आयोजन
प्रातः कालीन कार्यक्रम – भोर में निर्वाण कल्याणक 108 अभिषेक का आयोजन हुआ।
शुभ मुहूर्त में प्रतिष्ठा विधान – मंगल प्रतिष्ठा, माणेकस्तंभ रोपण, तोरण वंदन, प्रतिमाजी प्रतिष्ठा, गुरुमूर्ति प्रतिष्ठा, देव-देवी प्रतिष्ठा, ध्वज-दंड-कलश प्रतिष्ठा, महा मांगलिक, प्रतिष्ठा फल एवं धर्मदेशना सम्पन्न हुई।
धर्मसभा एवं गुरु भगवंतों को कांबली वहोरानो के लाभकर्ता: मदनराज तिलोकचंद कितावत परिवार
ध्वजा लाभार्थी – बस्तीमल चुनीलाल ढालावत परिवार, मुंबई एवं शांताबाई लालचंद ढालावत, रोहा।
शाही करबा लाभार्थी – गजरोबाई घीसूलाल राठौड़ एवं भंवरीबाई नगराज राठौड़ परिवार, बाली/मुंबई।
फले चुंदड़ी लाभार्थी – स्व. पानीबाई हस्तीमल सुखलाल चौपड़ा परिवार, बाली/निगड़ी (पुणे)।
सम्मान समारोह
बाली जैन संघ द्वारा दोनों मंडलों के कार्यकर्ताओं का तिलक, माला और मोमेंटो देकर बहुमान किया गया। बाली जैन संघ के अध्यक्ष बाबुभाई मंड़लेसा को “समाज सुभट” की उपाधि से सम्मानित किया गया।

श्री अष्टोत्तरी शांतिस्नात्र महापूजन
लाभार्थी – विमलादेवी आनंदराज गेमावत परिवार, बाली/मुंबई।
हेलीकॉप्टर पुष्प वर्षा
राउंड 1, 2, 3 के लाभार्थी – गुलाबीबाई राजमल राठौड़, बाली/अंधेरी एवं सरोजवेन रमेशकुमार राजमल राठौड़।
राउंड 4 के लाभार्थी – रूपीबाई छोगमल सरदारमल राठौड़ परिवार, बाली/मुंबई।
राउंड 5 के लाभार्थी – भाग्यवंती प्रकाशराज तिलोकचंद कितावत, बाली/मुंबई।
108 दीपक की महाआरती
लाभार्थी – स्व. मुलीबाई तिलोकचंद कितावत, बाली/मुंबई।
आयोजन समिति एवं ट्रस्ट मंडल
श्री ओसवाल श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ जैन संघ, बाली के अध्यक्ष बाबुभाई मंड़लेसा, सचिव कांतीभाई कितावत एवं अन्य पदाधिकारी इस आयोजन में शामिल रहे। पूरे प्रतिष्ठा महोत्सव की व्यवस्था महावीर जैन नवयुवक मंडल संस्थान द्वारा की गई, जिसके संयोजक मुकेश भंडारी एवं सह-संयोजक विक्रम राठौड़ थे। बाली मित्र मंडल मुंबई के संयोजक नरेन्द्र परमार एवं सह-संयोजक किरण कितावत के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाया। इस भव्य महोत्सव ने समाज में धर्म और भक्ति की भावना को और अधिक प्रबल किया।













