सरकार दामों को काबू में रखने ओर उपलब्धता जानने के लिए वनस्पति तेल उत्पादों के लिए नियम अधिसूचित करने की तैयारी में
छोटे उत्पादकों एवं थोक विक्रेताओं को इससे बाहर रखने की शंकर ठक्कर ने की मांग

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बताया केंद्रीय खाद्य उपभोक्ता मामले मंत्री प्रल्हाद जोशी भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते वक्त खाद्य तेल उद्योग से कच्चे खाद्य तेलों पर शुल्क में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाने में तत्परता बरतने को कहा है ताकि उपभोक्ताओं को खुदरा कीमतों में भी इसी अनुपात में कमी का अनुभव हो। वे गुरुवार (24 जुलाई, 2025) को भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित कर रहे थे।
जोशी ने सदस्यों से प्रसंस्करण और शोधन के माध्यम से मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने, दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवाचार का समर्थन करने को कहा।
उन्होंने कहा कि उद्योग प्राथमिक कृषि ऋण समितियों और कृषक उत्पादक संगठनों के साथ मिलकर सटीक कृषि, फसल प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टिकाऊ कृषि तकनीकों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर सकते हैं, तिलहन की उच्च उपज वाली किस्मों को बढ़ावा दे सकते हैं और कटाई के बाद की मूल्य श्रृंखला को मज़बूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत नवाचार, कृषि-तकनीक में बढ़े हुए निवेश और सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से, भारत घरेलू ज़रूरतों को पूरा करते हुए वैश्विक वनस्पति तेल बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बना रह सकता है।
मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में तिलहन उत्पादन 2014-15 के 275 लाख मीट्रिक टन (LMT) से 44% बढ़कर 2023-24 में 397 LMT हो गया है और उपज 2014-15 के 1,075 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से 22% बढ़कर 2023-24 में 1,314 किलोग्राम हो गई है। उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2023-24 में ऑयल मील, तिलहन और गौण तेलों का निर्यात लगभग 5.44 मिलियन टन था, जिसका मूल्य ₹29,587 करोड़ था।” उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक खाद्य तेल व्यापार में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जो वनस्पति तेलों का एक सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक है। उन्होंने कहा, “हम अपनी खाद्य तेल आवश्यकताओं का लगभग 56% आयात करते हैं।”
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि केंद्र सरकार आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत प्रावधानों के साथ वनस्पति तेल उत्पादों के विनियमन के लिए एक नया आदेश अधिसूचित करेगी। सचिव ने बताया कि 2025 का वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन और उपलब्धता विनियमन आदेश, 2011 के आदेश का स्थान लेगा। चोपड़ा ने कहा, “संघों से परामर्श किया गया है। यह अब अंतिम चरण में है, संभवतः अगले सप्ताह तक इसे अधिसूचित कर दिया जाएगा।
इस बैठक में उपस्थित रहे शंकर ठक्कर ने संजीव चोपड़ा से छोटे उत्पादक एवं थोक विक्रेताओं को इस नये कानून के दायरे से बाहर रखने की मांग की कई प्रकार के लाइसेंस से राज से जूझ रहे व्यापारी और एक नए कानून और उसका अनुपालन करने की स्थिति में नहीं है और यह भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री जी के “इस ऑफ डूइंग बिजनेस” के बिल्कुल विपरीत है।











