सरीफ उर्फ बबलू अंसारी ने दिया इस्तीफा, पार्टी की नीतियों पर उठाए सवाल

झामुमो युवा मोर्चा के संगठन विस्तार में विरोध
सरीफ अंसारी ने उठाए विरोध के स्वर
झामुमो युवा मोर्चा के संगठन विस्तार में प्रखंड युवा कोषाध्यक्ष पद पर मनोनीत हुए सरीफ उर्फ बबलू अंसारी ने पार्टी की नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया है। सरीफ अंसारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि झामुमो जैसी राष्ट्रीय पार्टी में कार्यकर्ताओं की मेहनत और लगन को अनदेखा किया जा रहा है, जिसका प्रभाव पार्टी की सेहत पर आने वाले दिनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
मुख्य बातें:
- सरीफ अंसारी और उनके पिता मनीर मस्तान कई वर्षों से झामुमो से जुड़े हैं।
- पार्टी की नीतियों के प्रति उनकी निष्ठा में कोई बदलाव नहीं आएगा।
- सरीफ अंसारी ने पद का त्याग किया लेकिन पार्टी के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
सरीफ अंसारी का बयान
“मैं और मेरे अब्बा मनीर मस्तान कई वर्षों से झामुमो के साथ जुड़े हुए हैं और बिना किसी पद के पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के अनुसार काम करते आए हैं, लेकिन अब हमारी अनदेखी की जा रही है।”
सरीफ अंसारी ने यह भी बताया कि जब उनके नाम की घोषणा अध्यक्ष पद के लिए लगभग तय मानी जा रही थी, तो अचानक समीकरण में बड़ा बदलाव कर दिया गया और उनका नाम इस पद से हटा दिया गया। इसके बाद उन्हें कोषाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। उनका कहना था कि वह और उनके पिता मनीर मस्तान कई वर्षों से झामुमो के साथ जुड़े हुए हैं और बिना किसी पद के पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के अनुसार काम करते आए हैं, लेकिन अब उनकी अनदेखी की जा रही है।
“मैं हमेशा से पार्टी की नीतियों और सिद्धांतों के साथ खड़ा रहा हूं, और आज भी बिना किसी पद के पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहूंगा, लेकिन इस प्रकार की राजनीति के खिलाफ मैं हमेशा अपनी आवाज उठाता रहूंगा।”
पार्टी के भीतर की राजनीति पर सवाल
सरीफ अंसारी ने आरोप लगाया कि इस बदलाव ने उन्हें निराश किया और पार्टी के भीतर की राजनीति में चल रही ‘भीतरघात’ का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा पार्टी के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं हो सकता, लेकिन यह उनकी असहमति का प्रतीक है।
सरीफ अंसारी ने यह भी साफ किया कि वह कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं, लेकिन पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने कहा, “मेरे लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है पार्टी की नीति और सिद्धांतों का पालन करना। मैं हमेशा उन कार्यकर्ताओं के लिए आवाज उठाता रहूंगा जिनकी मेहनत को अनदेखा किया जाता है।”
नए सवाल उठते हैं पार्टी के भविष्य पर
यह घटना झामुमो के संगठनात्मक ढांचे में एक नई चर्चा का कारण बन गई है, और पार्टी के भीतर चल रही राजनीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी के अन्य सदस्य और समर्थक यह देखना चाहते हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे सुलझाता है और कार्यकर्ताओं के साथ अनदेखी की स्थिति को किस तरह संबोधित करता है।














